भागलपुर/नोएडा — संस्कृत भाषा जिसे देववाणी कहा गया है, आज लुप्त होने की कगार पर है, लेकिन भागलपुर की बेटी माधवी मधुकर झा ने अपने स्वर-साधना से इस प्राचीन भाषा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि उसे विश्व स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई है। वे भारत की उन चुनिंदा गायिकाओं में हैं, जो संस्कृत स्तोत्रों को संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुँचा रही हैं।
पारंपरिक विरासत से मिली प्रेरणा
माधवी मधुकर का मायका बिहार के भागलपुर जिले के सबौर में है, जबकि ससुराल गोड्डा के डांडे गांव में। वे नोएडा में अपने पति इंजीनियर पीयूष झा के साथ रहती हैं। माधवी को संगीत की शिक्षा परिवार से मिली — सावन, नवरात्र, रामायण और दुर्गा चालीसा के पाठों से उनका सुरों से रिश्ता जुड़ा। भारतीय शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा कौशलेश पाठक से प्राप्त की। मैथिली और अंगिका गीतों से आगे बढ़ते हुए उन्होंने संस्कृत स्तोत्रों की गायन शैली को अपनाया।
आध्यात्मिक गुरुओं की शिष्या, काशी विश्वनाथ में दी प्रस्तुति
माधवी मधुकर गोवर्धन मठ के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती और पद्मविभूषण रामभद्राचार्य की शिष्या हैं। दूरदर्शन और आकाशवाणी पर उनके स्तोत्र प्रसारित होते रहे हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने हाल ही में मंदिर परिसर में उनकी प्रस्तुति आयोजित की थी, जिसे देशभर से सराहना मिली।
रामलला की प्रतिष्ठा में गाया स्तोत्र, पीएम मोदी भी थे मौजूद
अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर माधवी मधुकर ने अपने संस्कृत बैंड मधुरम वृंद के साथ प्रस्तुति दी थी, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कई केंद्रीय मंत्रियों ने सुना। यह प्रस्तुति संस्कृत संगीत की समकालीन महत्ता को दर्शाती है।
अमेरिका, नेपाल और भारत में है सबसे अधिक श्रोता
माधवी ने वर्ष 2019 में मधुरम वृंद की स्थापना की। आज उनके यूट्यूब चैनल पर हर महीने 1.4 करोड़ से अधिक श्रोता जुड़े हैं। अमेरिका, नेपाल और भारत में उनकी प्रस्तुतियाँ सबसे अधिक सुनी जाती हैं। अब तक वे 150 से अधिक संस्कृत, मैथिली और हिंदी गीत रिकॉर्ड कर चुकी हैं।
फिल्मों और वेब सीरीज में भी उनकी आवाज
माधवी का गाया कृष्णाष्टकम् और रोग नाशक मंत्र कोरोना काल में वायरल हुआ था। उन्हें यूट्यूब ने मई 2021 में सिल्वर बटन से सम्मानित किया। वे गुलाबी गैंग फिल्म की प्ले-बैक सिंगर रह चुकी हैं, और पंचायत वेब सीरीज-3 में मैथिली में गाया गया उनका भजन भी शामिल किया गया।
संस्कृत स्तोत्र में मिलती है सकारात्मक ऊर्जा
माधवी मानती हैं कि संस्कृत में गायन से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि इस भाषा में गाना कठिन होता है और शुद्ध उच्चारण की चुनौती भी रहती है, फिर भी लोग इन गीतों को भक्ति और ऊर्जा के साथ सुनते हैं।
सरलता के लिए सबटाइटल और सार
संस्कृत की कठिनता को ध्यान में रखते हुए माधवी हर गीत के साथ हिंदी और अंग्रेज़ी में सबटाइटल और श्लोकों का सार भी देती हैं, जिससे श्रोता भावार्थ समझ सकें। वे सरल शब्दों में संस्कृत स्तोत्र प्रस्तुत करती हैं ताकि युवा पीढ़ी भी जुड़ सके।
संस्कृति मंत्रालय और मध्यप्रदेश सरकार के साथ कार्य
माधवी वर्तमान में मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और एकात्मधाम के सहयोग से संस्कृत संगीत की निःशुल्क शिक्षा देती हैं। वे अब तक मध्यप्रदेश में सर्वाधिक लाइव शो कर चुकी हैं। बिहार-झारखंड में वे बहुत कम प्रस्तुतियाँ दे पाई हैं, जिसका उन्हें अफसोस है।
बॉलीवुड से दूर, संस्कृति के प्रति समर्पित
माधवी स्पष्ट करती हैं कि उन्हें अब तक बॉलीवुड से कोई प्रस्ताव नहीं मिला और न ही वे उसकी ओर जाना चाहती हैं। उनकी प्राथमिकता है — संस्कृत, संस्कृति और भक्ति को जनमानस तक पहुँचाना।
विशेष तथ्य:
- यूट्यूब पर 50 करोड़ से अधिक व्यूज़।
- हर महीने 1.4 करोड़ श्रोताओं की स्थायी उपस्थिति।
- दुनिया के कई देशों में ऑनलाइन संस्कृत सीखने वालों में वृद्धि।
- सोनपुर मेला और अजगैबीनाथ धाम में प्रस्तुति की तैयारी।


