पटना | 31 जुलाई 2025: राजद विधायक भाई वीरेंद्र और पंचायत सचिव संदीप कुमार के बीच चल रहा विवाद उस समय और गहरा गया जब एक महिला — पिंकी देवी — अपने दिवंगत पति का मृत्यु प्रमाण पत्र पाने के लिए दर-दर भटकते हुए आखिरकार दानापुर अनुमंडल न्यायालय की शरण में पहुंच गई। मामला अब सिर्फ प्रशासनिक विफलता का नहीं रहा, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और गरीब की बेबसी का प्रतीक बन चुका है।
रिश्वत नहीं दी तो नहीं मिला मृत्यु प्रमाण पत्र
पिंकी देवी, जिनके पति का हाल ही में निधन हुआ है, का आरोप है कि पंचायत सचिव संदीप कुमार ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में पहले 1,500 रुपए की मांग की। “मैंने जैसे-तैसे 500 रुपए दिए,” पिंकी देवी ने कहा, “लेकिन जब दुबारा गई तो उसने और पैसे मांगे। साफ कहा कि ऊपर तक पैसा देना होता है। और हद तो तब हो गई जब उसने मुझसे कहा — ‘जहां जाना है, जाओ।'”
पिंकी का आरोप है कि जब उसने अपनी आर्थिक तंगी की दुहाई दी, तो उसे धक्का देकर भगा दिया गया। आंखों में आंसू लिए पिंकी ने कहा, “मेरे पास कुछ नहीं बचा है… बस एक बच्चा है जिसे स्कूल भेजना है। उसके लिए भी अगर रिश्वत देनी पड़े तो फिर गरीब कैसे जिए?”
“मुझे उम्मीद है, अदालत इंसाफ देगी”
दानापुर न्यायालय में उपस्थित होकर पिंकी देवी ने भावुक होकर न्यायाधीश से कहा, “मुझे अब सिर्फ़ इंसाफ चाहिए। पंचायत नहीं सुनती, इसलिए अदालत आई हूं। कम से कम यहां मेरी फरियाद सुनी जाएगी।”
विवाद में आया नया मोड़ — विधायक और सचिव आमने-सामने
जब पिंकी देवी को न्याय नहीं मिला, तो उन्होंने राजद विधायक भाई वीरेंद्र से संपर्क किया। विधायक ने सचिव संदीप कुमार को फोन कर मामले की जानकारी ली। लेकिन यह बातचीत कठोर शब्दों और आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई।
सचिव संदीप कुमार ने विधायक पर फोन पर धमकी देने का आरोप लगाते हुए पटना के एससी/एसटी थाने में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं विधायक ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा, “मैंने सिर्फ़ एक महिला की मदद करनी चाही। लेकिन अफसरशाही को शायद यह पसंद नहीं आया।”
“मैं तो बस अपने पति का प्रमाण पत्र चाहती हूं” — पिंकी देवी
मामले में खुद को विवाद के बीच फंसा देख पिंकी देवी ने अपनी निराशा ज़ाहिर की। उन्होंने कहा, “मैं किसी लड़ाई का हिस्सा नहीं बनना चाहती थी। मैं बस अपने बच्चे को स्कूल भेजना चाहती थी। अगर सिस्टम ही नहीं सुनेगा, तो एक गरीब महिला आखिर कहां जाए?”
Voice of Bihar प्रशासन और सरकार से अपील करता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और पिंकी देवी को उसका हक बिना देरी के मिले। एक महिला को पति की मौत के बाद न्याय के लिए भी संघर्ष करना पड़े, यह लोकतंत्र पर एक सवालिया निशान है।


