पूर्व रेलवे की मार्च और जून 2025 तिमाही के लिए क्षेत्रीय रेल राजभाषा कार्यान्वयन समिति की संयुक्त बैठक सोमवार को पूर्व रेलवे मुख्यालय, फेयरली प्लेस स्थित महाप्रबंधक के नए सभागार में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता अपर महाप्रबंधक श्री शीलेन्द्र प्रताप सिंह ने की।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े मंडल और कारखाने
इस बैठक में हावड़ा, सियालदह, आसनसोल एवं मालदा मंडलों के साथ-साथ लिलुआ, कांचरापाड़ा और जमालपुर कारखानों के प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। सभी विभागाध्यक्षों की सक्रिय भागीदारी रही।
डॉ. मधुसूदन दत्त की पहली बैठक
पूर्व रेलवे के प्रधान कार्यालय में पदस्थापित वरिष्ठ राजभाषा अधिकारी डॉ. मधुसूदन दत्त ने इस समिति में सदस्य सचिव के रूप में अपनी पहली बैठक का सफल संचालन किया। उन्होंने बैठक की अध्यक्षता करने के लिए अपर महाप्रबंधक का आभार जताया और हिंदी को मुख्यधारा में लाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
ई-माध्यम में हिंदी के उपयोग पर ज़ोर
प्रधान मुख्य बिजली इंजीनियर एवं मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री देवेन्द्र कुमार ने स्वागत संबोधन में कहा कि अब हिंदी फाइलें केवल हार्डकॉपी नहीं, ई-फाइलिंग प्रणाली में भी सक्रिय रूप से उपयोग में लाई जानी चाहिए। उन्होंने उद्घाटन पट्टिकाओं में भी हिंदी के उपयोग को अनिवार्य बताया।
हिंदी टेम्पलेट्स और एचआरएमएस में उपयोग की सलाह
अपर महाप्रबंधक श्री शीलेन्द्र प्रताप सिंह ने कार्यालयीन कार्यों में सरल हिंदी भाषा और टेम्पलेट्स के प्रयोग की सलाह दी। उन्होंने सुझाव दिया कि कर्मचारी एचआरएमएस पोर्टल पर भी नाम, छुट्टी आवेदन जैसी प्रविष्टियों में हिंदी का प्रयोग करें, ताकि हिंदी का दायरा व्यापक हो।
18 विजेताओं को पुरस्कार
इस अवसर पर वर्ष 2025 की हिंदी निबंध लेखन, टिप्पण लेखन, प्रारूप लेखन और वाक् प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले मंडलों व कारखानों से आए कुल 18 विजेताओं को अपर महाप्रबंधक ने प्रमाण-पत्र व नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया। साथ ही, 6 कर्मचारियों को आधार वर्ष 2021 के लिए व्यक्तिगत नकद पुरस्कार भी प्रदान किए गए।
‘प्रतिबिंब’ पत्रिका के संयुक्त अंक का विमोचन
बैठक के अंत में पूर्व रेलवे मुख्यालय द्वारा प्रकाशित त्रैमासिक हिंदी पत्रिका ‘प्रतिबिंब’ के जनवरी-जून 2025 संयुक्त अंक का विमोचन अपर महाप्रबंधक महोदय द्वारा किया गया।
धन्यवाद ज्ञापन और समापन
बैठक का समापन डॉ. मधुसूदन दत्त के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिन्होंने इसे राजभाषा के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन की दिशा में एक प्रभावशाली पहल बताया।
यह बैठक न केवल हिंदी के प्रशासनिक उपयोग को बल देने की दिशा में महत्त्वपूर्ण रही, बल्कि कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने का एक सशक्त मंच भी सिद्ध हुई।


