भागलपुर | सावन 2025 — सावन के पावन महीने में सुल्तानगंज में शिवभक्तों की अपार आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। देश के कोने-कोने से कांवरिए बाबा धाम की ओर कूच कर रहे हैं। इसी क्रम में पश्चिम बंगाल से आए श्रद्धालुओं की एक टोली ने 100 किलो वजनी बजरंगबली कांवर के साथ अजगैबीनाथ गंगा घाट पर भक्ति का नया उदाहरण पेश किया है।
इस विशालकाय कांवर में भगवान हनुमान की भव्य प्रतिमा, रंग-बिरंगे सजावटी कपड़े और आकर्षक विद्युत सज्जा ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा। यह कांवर न सिर्फ अपने वजन को लेकर, बल्कि अपनी अनूठी कारीगरी और भक्ति की भावना के लिए भी श्रद्धा का केंद्र बन गया है।
15 दिन की मेहनत, 20 लोगों की टीम
बताया जा रहा है कि इस विशेष कांवर को तैयार करने में करीब 20 लोगों की टीम ने 15 दिन तक लगातार परिश्रम किया। कांवर को इस तरह से सजाया गया है कि रात में इसकी बिजली से की गई सजावट दूर से ही भक्तों को आकर्षित कर रही है।
भक्ति के आगे कोई भार भारी नहीं
श्रद्धालुओं का कहना है कि यह कांवर केवल भक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि एक आस्था का संदेश है — “सच्ची श्रद्धा के आगे कोई भार भारी नहीं होता।” सुल्तानगंज की घाटी में यह कांवर श्रद्धा, समर्पण और शौर्य की एक मिसाल बन गया है।
हर साल पेश होती है भक्ति की नई मिसाल
सावन महीने में सुल्तानगंज से देवघर तक निकलने वाली कांवर यात्रा के दौरान इस तरह के विशेष कांवर हर वर्ष श्रद्धा और भक्ति की नई मिसाल पेश करते हैं। इन कांवरों की भव्यता, उनके निर्माण में लगने वाली मेहनत और उसमें समाई आस्था, कांवर यात्रा को एक आध्यात्मिक उत्सव में बदल देती है।


