नाथनगर, भागलपुर | 23 जुलाई 2025: अब बिहार पुलिस के नव नियुक्त सिपाही अपने प्रशिक्षण के दौरान ‘जीविका दीदी की रसोई’ में बने शुद्ध, पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेंगे। बुधवार को नाथनगर स्थित सिपाही प्रशिक्षण केंद्र में इस रसोई का विधिवत उद्घाटन किया गया।
प्रशिक्षणरत जवानों को अब घर जैसा खाना
सुंदर जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ, नाथनगर द्वारा संचालित इस रसोई में 70 से अधिक जीविका दीदियाँ कार्यरत हैं, जो हर दिन 1000 से अधिक प्रशिक्षु सुरक्षा कर्मियों के लिए भोजन बनाएंगी। यह पहल स्वास्थ्यवर्धक भोजन की सुविधा के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और रोजगार का बड़ा जरिया बन रही है।
पुलिस अधीक्षक सह सीटीएस प्राचार्य और जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक ने संयुक्त रूप से रसोई का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक ने कहा:
“प्रशिक्षु जवानों को समय पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी जीविका दीदियों को दी गई है। हमें पूरा विश्वास है कि वे इसे पूरी निष्ठा से निभाएंगी।”
नवगछिया में भी जीविका दीदी की रसोई सक्रिय
इससे पहले सोमवार को नवगछिया पुलिस लाइन में भी जीविका दीदी की रसोई शुरू की गई। वहाँ 260 प्रशिक्षु पुलिसकर्मियों को श्रृष्टि जीविका महिला संकुल स्तरीय संघ द्वारा भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें 24 जीविका दीदियाँ कार्यरत हैं।
भागलपुर में 8 स्थानों पर चल रही दीदी की रसोई
जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक ने बताया कि पुलिस विभाग और जीविका के बीच हुए समझौते के तहत राज्य भर के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में ‘दीदी की रसोई’ संचालित की जा रही है।
भागलपुर में अभी तक:
- नाथनगर सिपाही प्रशिक्षण केंद्र
- पुलिस लाइन नवगछिया
- जल्द ही पुलिस लाइन भागलपुर में भी शुरुआत
- बड़े सरकारी अस्पतालों और डॉ. अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों में भी यह सेवा पहले से जारी
अब जिले में कुल 8 स्थानों पर ‘दीदी की रसोई’ संचालित हो रही है, जिससे 200 से अधिक महिलाएं सीधा रोजगार पा रही हैं।
महिला सशक्तिकरण की प्रेरक मिसाल
‘जीविका दीदी की रसोई’ न सिर्फ सरकारी संस्थानों में पोषणयुक्त भोजन की आपूर्ति सुनिश्चित कर रही है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण का एक सशक्त उदाहरण बन गई है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं आज साफ-सफाई, खानपान और प्रबंधन जैसी सेवाओं में अहम भूमिका निभा रही हैं।
“हमारे परिश्रम से आज हम न सिर्फ कमाई कर रहे हैं, बल्कि आत्मनिर्भर और समाज के लिए उपयोगी भी बन रहे हैं।” — एक जीविका दीदी
‘दीदी की रसोई’ जैसे नवाचार स्वस्थ संस्थागत भोजन, महिला रोजगार, और समुदाय आधारित विकास का बेहतरीन संयोजन हैं। यह पहल आने वाले समय में राज्य भर के अन्य विभागों में भी महिला सहभागिता को और विस्तार दे सकती है।


