पटना/मुजफ्फरपुर/बघनगरी।बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत पटना के कुम्हरार थाने में जब्त एक कार के अधिहरण को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जब्ती नोटिस उस वाहन के नाम पर भेजा गया है, जो मिथिलापीठ बघनगरी स्थित राम जानकी मठ के परिसर में चार महीने से खड़ी है।
नोटिस मठ के महंत डॉ. श्यामसुंदर दास को मिला, जिनका दावा है कि हुंडई अल्काजार कार (नंबर BR06PF2627) मठ परिसर में सुरक्षित है और उन्होंने इसे कभी किसी को चलाने नहीं दिया।
गाड़ी वही, नंबर वही, चेसिस नंबर भी वही – फिर असली कौन?
चौंकाने वाली बात यह है कि कुम्हरार थाना में जब्त गाड़ी के न केवल रजिस्ट्रेशन नंबर, बल्कि चेसिस नंबर और एचएसआरपी प्लेट तक वही हैं जो महंत की गाड़ी पर हैं। ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या कोई क्लोन गाड़ी (duplicate vehicle) बाजार में चल रही है? या फिर यह किसी बड़े फर्जीवाड़े का हिस्सा है?
महंत श्यामसुंदर दास ने स्पष्ट किया है कि उनकी गाड़ी का रंग सफेद है और वह लगातार मठ परिसर में ही खड़ी रहती है। फिर उनकी गाड़ी के नाम पर जब्ती और अधिरोपण नोटिस भेजना बेहद आपत्तिजनक है।
क्या कहता है नोटिस?
पटना उत्पाद विभाग की ओर से 24 मार्च 2025 को कांड दर्ज किया गया। इसके आधार पर सहायक आयुक्त मद्यनिषेध, पटना ने अधिहरण वाद की प्रक्रिया शुरू की। महंत को भेजे गए नोटिस में लिखा गया है:
“23 जुलाई को पहली और 31 जुलाई को अंतिम सुनवाई होगी। यदि वाहन मुक्त कराना है तो नवीनतम बीमा मूल्य के आधार पर जुर्माना राशि जमा करनी होगी, अन्यथा वाहन का अधिहरण किया जाएगा।”
सड़क पर पकड़ी गई, या कागजों में?
सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस गाड़ी की नीलामी की प्रक्रिया शुरू हो रही है, वह वास्तव में कहां है?
इस गाड़ी (BR06PF2627) पर 7 मई 2025 को मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के पास बिना सीट बेल्ट के ट्रैफिक उल्लंघन का ₹1188 का चालान भी हुआ था। यह दर्शाता है कि किसी अन्य स्थान पर हूबहू नंबर और चेसिस वाली एक गाड़ी चल रही है, जबकि असली गाड़ी तो मठ में खड़ी है।
संत समाज और सामाजिक संगठनों की नाराजगी
इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मिलते ही संत समाज और अनुयायीगण मठ में एकत्र होने लगे हैं। महंत को मिले नोटिस को बिना जांच के की गई गंभीर लापरवाही बताया जा रहा है।
संतों और समाजिक संगठनों ने राज्य सरकार और मद्य निषेध विभाग से इस प्रकरण की स्वतंत्र उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बिना किसी भौतिक सत्यापन और तकनीकी जांच के किसी प्रतिष्ठित संत के नाम पर कार की जब्ती और नीलामी की प्रक्रिया शर्मनाक है।
महंत बोले – ‘जवाब न्यायालय में देंगे’
महंत डॉ. श्यामसुंदर दास ने कहा:
“मैंने इस गाड़ी को किसी को नहीं दिया। यह मेरे मठ में मौजूद है। जो नोटिस आया है, उसका सम्मान करते हुए मेरे वकील न्यायालय में जवाब देंगे। लेकिन इस प्रकार की कार्यवाही से मेरी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।”
सवाल जो प्रशासन को जवाब देना होगा:
- एक ही रजिस्ट्रेशन और चेसिस नंबर की दो गाड़ियां कैसे चल रही हैं?
- क्या यह वाहन नंबर और HSRP क्लोनिंग का मामला है?
- जब्ती से पहले क्या वाहन का असली-नकली सत्यापन किया गया?
- क्या ऐसे मामलों से मद्य निषेध अभियान की छवि धूमिल नहीं होती?
यह मामला वाहन पंजीकरण प्रणाली, HSRP प्लेट की सुरक्षा और मद्य निषेध विभाग की जांच प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े करता है। यदि बिना भौतिक सत्यापन के किसी निर्दोष व्यक्ति की प्रतिष्ठा और संपत्ति पर कार्रवाई की जा सकती है, तो यह नागरिक अधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी पारदर्शिता और तत्परता से जांच करता है, और महंत श्यामसुंदर दास को न्याय कब तक और कैसे मिलता है।


