भागलपुर, 16 जुलाई 2025 | भागलपुर की लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा देने के उद्देश्य से मंगलवार को सात दिवसीय मंजूषा कला कार्यशाला का भव्य उद्घाटन किया गया। यह कार्यशाला कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार, जिला प्रशासन भागलपुर और भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई है।
इस अवसर पर कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री मोतीलाल प्रसाद, भागलपुर नगर निगम की महापौर वसुंधरा लाल, जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन, सहायक संग्रहालय अध्यक्ष डॉ. सुधीर कुमार यादव, बिहार संग्रहालय पटना के अपर निदेशक अशोक कुमार, मंजूषा कलाकार, कला प्रेमी एवं अनेक छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
मंजूषा कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का प्रयास
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मंत्री मोतीलाल प्रसाद ने कहा,
“अंगप्रदेश की सांस्कृतिक परंपरा अत्यंत समृद्ध है। बिहुला-विषहरी की लोकगाथा पर आधारित मंजूषा चित्रकला बिहार की अद्वितीय लोक कलाओं में से एक है। सरकार इस कला को पुनर्जीवित करने और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। यह कार्यशाला उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।”
उन्होंने यह भी बताया कि कार्यशाला में तैयार की गई कलाकृतियाँ भागलपुर संग्रहालय में आम दर्शकों के लिए प्रदर्शित की जाएंगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इस विशिष्ट परंपरा को समझ सकें और इससे जुड़ सकें।
कलाकारों का उत्साहवर्धन और प्रशिक्षक केंद्र की मांग
कार्यक्रम के दौरान बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि
“बिहार की लोक कलाओं की पहचान सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बनी है। यहाँ के कलाकारों को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान मिला है।”
राज्य पुरस्कार प्राप्त कई कलाकारों ने मंच से भागलपुर में मंजूषा कला के लिए एक स्थायी प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की मांग भी की, जिससे युवा पीढ़ी इस लोककला को सीख सके और इसका भविष्य सुनिश्चित हो सके।
31 कलाकार करेंगे सात दिन तक सृजन
इस कार्यशाला के लिए चयन समिति द्वारा 31 मंजूषा कलाकारों का चयन किया गया है। ये सभी कलाकार आगामी सात दिनों तक एक साथ कार्यशाला में भाग लेंगे और पारंपरिक मंजूषा चित्रों का सृजन करेंगे।


