भागलपुर, 15 जुलाई 2025: बिहार में जलवायु परिवर्तन से निपटने और हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में जीविका दीदियों ने एक अहम जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है। जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत भागलपुर जिले में इस वर्ष 2 लाख 54 हजार से अधिक पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए जिले के 28,554 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3 लाख 39 हजार से अधिक दीदियां कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प ले चुकी हैं।
नर्सरी से लेकर पौधारोपण तक: दीदियों की हरियाली यात्रा
पौधों की आपूर्ति के लिए राज्यभर में 23 दीदी की नर्सरी सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। इनमें से 16 नर्सरियां मनरेगा और 9 पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सहयोग से चलाई जा रही हैं। इन नर्सरियों में जीविका दीदियों को प्रशिक्षण प्रदान कर पौध तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे शिशु पौधों की समय पर और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, पोषण और आय का भी स्रोत
पिछले वर्ष भी जीविका दीदियों ने 2 लाख से अधिक पौधे लगाए थे। इस बार पौधों के चयन में जैव विविधता को प्राथमिकता दी जा रही है। पर्यावरण संरक्षण और अधिक ऑक्सीजन देने वाले पीपल, नीम जैसे पेड़ों के साथ-साथ आम, अमरूद, नींबू, नारियल, बेल जैसे फलदार वृक्ष, कटहल, सहजन जैसी पोषणवर्धक सब्जियों के पौधे और सागवान, महोगनी जैसे इमारती लकड़ी के पेड़ लगाए जाएंगे।
इन पौधों से न केवल हरित आवरण में वृद्धि होगी, बल्कि दीदियों के परिवारों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति और आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री की पहल का विस्तार
यह पूरी पहल मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किए गए ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बिहार में पर्यावरण संरक्षण, जल प्रबंधन और हरित आवरण को बढ़ाना है। जीविका दीदियां इस अभियान की प्रमुख सहभागी बनकर सामने आई हैं।
पर्यावरण के साथ घरों में भी आई खुशहाली
संचार प्रबंधक, जीविका के अनुसार,
“जीविका दीदियों द्वारा संचालित यह हरित अभियान राज्य में पर्यावरण सुधार की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है। इससे न केवल हरियाली बढ़ रही है, बल्कि दीदियों के जीवन में भी खुशहाली आ रही है।“
यह पहल न केवल एक हरित क्रांति है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल भी है।


