पटना, 15 जुलाई 2025 – राज्यसभा सांसद और जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा ने मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल द्वारा पश्चिमी कोसी नहर परियोजना के विस्तारीकरण, पुनर्स्थापन एवं आधुनिकीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया। ₹8678.29 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से मिथिला क्षेत्र की तस्वीर बदलने की उम्मीद जताई गई है।
संजय कुमार झा ने कहा कि यह परियोजना दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर जिलों की कृषि व्यवस्था को नया जीवन देगी और इन इलाकों में हरियाणा-पंजाब जैसी खेती की संभावनाएं विकसित होंगी।
“यह न केवल एक सिंचाई परियोजना है, बल्कि मिथिला के किसानों के लिए समृद्धि का द्वार है,” उन्होंने कहा।
प्रमुख विशेषताएं:
- 741 किलोमीटर लंबी नहरों की पक्की सीमेंट कंक्रीट लाइनिंग।
- वार्षिक सिंचन क्षमता 2.91 लाख हेक्टेयर से अधिक।
- 338 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण नहर किनारे।
- 990 नई संरचनाएं और 763 पुरानी संरचनाओं की मरम्मत।
- 260 नए पुल और 407 पुराने पुलों की मरम्मत।
इस परियोजना के तहत नेपाल से बहने वाली नहरों और बिहार भूभाग में वितरण प्रणाली को सशक्त किया जाएगा। साथ ही उगनाथ, विदेश्वरस्थान और काकरघाटी शाखा नहरों का विस्तार होगा, जिससे अतिरिक्त 58,658 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी।
संजय झा ने बताया कि उनके जल संसाधन मंत्री रहते हुए 2020 में इस परियोजना के प्रारंभिक पुनर्जीवन कार्यों की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत 735 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई और कई गांवों में पहली बार नहर का पानी पहुँचा।
इन इलाकों को होगा सीधा लाभ
- दरभंगा के 16 प्रखंड – अलीनगर, बहेड़ी, बिरौल, हायाघाट, तारडीह आदि।
- मधुबनी के 20 प्रखंड – झंझारपुर, मधेपुर, बेनीपट्टी, बासोपट्टी, रहिका, हरलाखी आदि।
- कुल 24 लाख से अधिक ग्रामीण लाभान्वित होंगे।
वित्तीय सहयोग में केंद्र सरकार की भूमिका
संजय झा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मधुबनी दौरे और उनकी ओर से केंद्रीय बजट में इस परियोजना के लिए सहयोग की घोषणा को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने बिहार के जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के योगदान की भी सराहना की और कहा कि अगले 3-4 वर्षों में मिथिला क्षेत्र की खेती, ग्रामीण ढांचा और किसानों का जीवन पूरी तरह बदल जाएगा।


