एडमिट कार्ड पर हस्ताक्षर के बावजूद छात्रों को अनुपस्थित घोषित करना गलत: छात्र जदयू

भागलपुर, 15 जुलाई 2025: भागलपुर विश्वविद्यालय में परीक्षा के दौरान उपस्थित छात्रों को अनुपस्थित घोषित करने के मामले में छात्र जदयू ने सोमवार को विरोध दर्ज कराया। इस संबंध में छात्र जदयू की ओर से एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें संगठन के जिला अध्यक्ष गोलू मंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।

गोलू मंडल ने कहा कि कई छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में सम्मिलित हुए थे, उनके एडमिट कार्ड पर परीक्षक के हस्ताक्षर भी मौजूद हैं, इसके बावजूद उन्हें अनुपस्थित घोषित कर दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में यह कैसे संभव है कि छात्र परीक्षा में उपस्थित होने के बावजूद अनुपस्थित घोषित कर दिए जाएं।

“जब एडमिट कार्ड पर एग्जामिनर के सिग्नेचर मौजूद हैं, तब छात्रों को अनुपस्थित घोषित करना सरासर लापरवाही है।” — गोलू मंडल, अध्यक्ष, छात्र जदयू


विश्वविद्यालय से लगातार लगाई जा रही गुहार

जिला अध्यक्ष ने बताया कि इस समस्या से जूझ रहे छात्र पिछले दो महीने से लगातार विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेजों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक किसी स्तर पर समाधान नहीं हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन की चुप्पी और निष्क्रियता पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि यह छात्रों के साथ अन्याय है।

छात्रा कोमल, जो स्वयं इस स्थिति की शिकार हैं, ने प्रेस वार्ता में बताया:
“मैं परीक्षा में उपस्थित थी, लेकिन मुझे गैरहाजिर दिखाया गया है। मैं दो महीने से कॉलेज और विश्वविद्यालय का चक्कर लगा रही हूं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।”


मानसिक तनाव और शैक्षणिक नुकसान

छात्र जदयू ने कहा कि बिहार सरकार छात्र कल्याण के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण छात्रों को मानसिक तनाव और अकादमिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ छात्रों को इंटरनल परीक्षा में फेल करने के बाद एक्सटर्नल परीक्षा में भी जानबूझकर फेल कर दिया गया है, जो शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।


नई शिक्षा नीति को लेकर भी चिंता, लिखित आश्वासन की मांग

प्रेस वार्ता के दौरान छात्र नेताओं ने नई शिक्षा नीति (NEP) को लागू करते समय पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही न हो, इसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित रूप से आश्वासन देना चाहिए।


आंदोलन की चेतावनी

छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो छात्र संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि छात्र अपने भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेंगे।


छात्र जदयू की ओर से उठाए गए इन सवालों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कार्रवाई करता है और छात्रों के हितों की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है।


 

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