बिहार में स्टार्ट-अप को मिलेगा अनोखा मंच, लॉन्च हुआ ‘बिहार आइडिया फेस्टिवल पोर्टल’

पटना, 15 जुलाई 2025।बिहार के युवाओं और नवाचार प्रेमियों को एक नई उड़ान देने के उद्देश्य से “बिहार आइडिया फेस्टिवल पोर्टल” का औपचारिक उद्घाटन सोमवार को राज्य के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने सूचना भवन स्थित सभागार में किया। इस पोर्टल के माध्यम से छात्र, नव उद्यमी, स्टार्टअप टीमें और ग्रामीण नवाचारकर्ता अपने आइडिया ऑनलाइन जमा कर सकेंगे।

मंत्री ने कहा कि, “हर बिहारी के भीतर एक बेहतरीन विचार छिपा होता है, बस जरूरत होती है उसे दिशा देने की। ‘बिहार आइडिया फेस्टिवल’ उसी दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।”

10 हजार नवाचारों की होगी तलाश

इस पोर्टल के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कम-से-कम 10,000 इनोवेटिव आइडिया इस मंच पर आएं। इन विचारों की समीक्षा विशेषज्ञों की एक टीम करेगी। चुने गए स्टार्ट-अप्स को बाजार, निवेशक और सरकारी सहयोग से जोड़ा जाएगा।

यह पोर्टल पूरी तरह मोबाइल-फ्रेंडली है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे कस्बों के युवा भी आसानी से www.startupbihar.in पर पंजीकरण कर सकेंगे।

24 जुलाई से जिला स्तरीय कार्यशालाएं, अगस्त में मेगा इवेंट

उद्योग मंत्री ने बताया कि इस महोत्सव की शुरुआत 24 जुलाई से जिला स्तर पर कार्यशालाओं के साथ होगी और अगस्त के अंतिम सप्ताह में पटना में दो दिवसीय मेगा इवेंट के साथ इसका समापन होगा।

राज्य के चयनित नवाचारों को “स्टार्ट-अप बिहार नीति” के तहत 10 लाख रुपये तक की फंडिंग, सलाहकार सेवाएं, ट्रॉफी, और राज्यस्तरीय पहचान दी जाएगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि “स्टार्ट-अप दीदी” मॉडल के जरिए जीविका की तरह हजारों महिलाएं भी उद्यमिता के पथ पर आगे बढ़ेंगी, जिससे ग्रामीण महिलाएं सशक्त होंगी।

बिहार बना स्टार्टअप का गढ़

उद्योग मंत्री के अनुसार, बिहार वर्तमान में देश में तीसरे स्थान पर है, जहां अब तक लगभग 1000 स्टार्टअप्स का चयन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 1.5 लाख स्टार्टअप पंजीकृत हैं और बिहार की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है।

ग्रामीणों, किसानों और कारीगरों को मिलेगा मंच

उद्योग विभाग के अपर मुख्य सचिव मिहिर कुमार सिंह ने बताया कि यह पहल शहरी केंद्रित स्टार्टअप संस्कृति को तोड़ते हुए ग्रामीण समुदायों, कारीगरों, किसानों और वंचित वर्गों को भी स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ने का प्रयास है।

इस मौके पर निदेशक (उद्योग) मुकुल गुप्ता, निदेशक (हथकरघा एवं रेशम) निखिल धनराज निप्पणिकर, विभिन्न इनक्यूबेशन केंद्रों के प्रतिनिधि और राज्य भर से आए नवाचारकर्ता उपस्थित थे।


 

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