देवघर/दुमका।राजकीय श्रावणी मेला-2025 का दूसरा दिन श्रद्धा, भक्ति और अनुशासन का अद्भुत संगम लेकर आया। शनिवार को बाबा बैद्यनाथधाम में करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ गंगाजल से बाबा पर जलार्पण किया। वहीं बासुकीनाथ धाम में भी लगभग 42 हजार कांवरियों ने जलाभिषेक कर पुण्य अर्जित किया।
रात से शुरू हुआ कतारबद्ध दर्शन, आठ किलोमीटर लंबी कतार
श्रावणी मेले के तहत शुक्रवार की आधी रात से ही कांवरिया बीएड कॉलेज तक कतारबद्ध हो गए थे। अनुमान के अनुसार, श्रद्धालुओं की कतार करीब 8 किलोमीटर तक लंबी रही। शाम 6 बजे तक जलार्पण का क्रम जारी रहा।
प्रातः 3:05 बजे खुला बाबा मंदिर का पट
शनिवार की सुबह 3:05 बजे बाबा वैद्यनाथ मंदिर का गर्भगृह श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोला गया। पहले सरकारी पूजा और कांचा जल पूजा हुई, जिसके बाद आम भक्तों के लिए जलार्पण की शुरुआत हुई।
स्पर्श पूजा पर रोक, अरघा से हो रहा जलार्पण
सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्पर्श पूजा पर रोक लगाई गई है। श्रद्धालु अब चार अरघा के माध्यम से orderly तरीके से जलार्पण कर रहे हैं।
बारिश के बाद धूप, फिर भी श्रद्धालुओं में उत्साह बरकरार
हाल के दिनों में झमाझम बारिश के बाद शनिवार को सूरज अपने रौद्र रूप में नजर आया। इसके बावजूद कांवरियों और श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखी। बोल-बम के जयघोष और महाशिव जाप के साथ कांवरिए बाबा नगरी में निरंतर पहुंचते रहे।
बासुकीनाथ धाम में भी श्रद्धा की बयार
बासुकीनाथ (दुमका)।
शनिवार को 2:45 बजे फौजदारी बाबा बासुकीनाथ मंदिर के गर्भगृह का पट खोला गया। सरकारी प्रभात पूजा के साथ ही पंडा समाज द्वारा कांचा जल अर्पित किया गया। इसके बाद आम भक्तों के लिए मंदिर खोल दिया गया।
दोपहर की विश्राम पूजा तक करीब 42,000 श्रद्धालु बाबा बासुकीनाथ पर गंगाजल अर्पित कर चुके थे। दर्शन और जलाभिषेक की व्यवस्था को लेकर मंदिर समिति और जिला प्रशासन की तैयारी प्रशंसनीय रही।
व्यवस्था और सुरक्षा
बाबा नगरी में श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा, जल आपूर्ति, शौचालय, मेडिकल कैंप और नियंत्रण कक्ष जैसी सुविधाएं दुरुस्त रखी गई हैं। CCTV निगरानी, पेट्रोलिंग दस्ते, बोल-बम रूट प्लान और सेवा शिविरों ने भी भक्तों की सहायता की।
श्रावण मास के पहले सोमवार तक भीड़ में और बढ़ोतरी की संभावना है। प्रशासन ने अपील की है कि श्रद्धालु संयम और सहयोग से जलार्पण करें तथा तय मार्ग का ही पालन करें।


