दुम्मा (बिहार-झारखंड सीमा), 11 जुलाई: विश्वप्रसिद्ध श्रावणी मेले की औपचारिक शुरुआत गुरुवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुई। एक महीने तक चलने वाले इस भक्ति पर्व का उद्घाटन राज्य के पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका सिंह पांडेय और श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन स्थल दुम्मा (बिहार-झारखंड सीमा) पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
शुक्रवार से जलार्पण की शुरुआत, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
मेले के उद्घाटन के साथ ही शुक्रवार से सावन महीने का पहला दिन प्रारंभ हो गया है। इस दिन बाबा वैद्यनाथ धाम में जलार्पण के लिए विशेष भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। राज्य और जिला पुलिस बल के अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है, साथ ही निगरानी के लिए सीसीटीवी और ड्रोन की सहायता भी ली जा रही है।
मेले को मिलेगा नया स्वरूप, फुट ओवरब्रिज बनेगा
उद्घाटन समारोह में उपस्थित पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने घोषणा की कि कांवरियों की सुविधा के लिए सरकार द्वारा फुट ओवरब्रिज का निर्माण कराया जाएगा। यह ओवरब्रिज खिजुरिया से मानसरोवर क्यू कॉम्प्लेक्स तक बनेगा, जहां श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा की पूजा के लिए बढ़ते हैं। इससे कांवरियों को जाम, धक्का-मुक्की और असुविधा से राहत मिलेगी और वे बिना किसी रुकावट के बाबा मंदिर तक पहुंच सकेंगे।
जनप्रतिनिधियों की रही अहम उपस्थिति
कार्यक्रम में देवघर विधायक सुरेश पासवान, जरमुंडी विधायक देवेंद्र कुमार, सारठ विधायक उदय शंकर सिंह उर्फ चुन्ना सिंह, पूर्व मंत्री बादल पत्रलेख समेत कई जनप्रतिनिधि एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने कांवरियों को शुभकामनाएं दीं और श्रावणी मेला के ऐतिहासिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला।
आस्था, प्रशासन और परंपरा का संगम
श्रावणी मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह बिहार और झारखंड की सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक बन गया है। मेला क्षेत्र में प्रशासन ने पेयजल, स्वास्थ्य, विश्राम, स्वच्छता, ट्रैफिक और मार्गदर्शन की समुचित व्यवस्था की है। लाखों कांवरिए हर साल गंगाजल लेकर सुल्तानगंज से देवघर पहुंचते हैं और बाबा वैद्यनाथ को जलार्पित करते हैं।


