सुलतानगंज/देवघर। श्रावणी मेला में हर साल देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना के लिए सुलतानगंज स्थित अजगैवीनाथ धाम से बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) तक जल चढ़ाने की यात्रा पर निकलते हैं। इन कांवरियों की यात्रा भक्ति, उत्साह और विभिन्न प्रकार की परंपराओं से जुड़ी होती है। मुख्य रूप से चार प्रकार के कांवरिया इस पवित्र यात्रा में भाग लेते हैं:
1. सामान्य बम
इनकी संख्या सबसे अधिक होती है। ये कांवरिए जल भरने के बाद पैदल यात्रा करते हैं और रास्ते में विश्राम करते हुए 4 से 5 दिनों में बाबाधाम पहुंचते हैं। ये खाते-पीते, भक्ति गीत गाते हुए यात्रा को आनंदमय बनाते हैं।
2. डाक बम
पिछले कुछ वर्षों में डाक बमों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हुई है। ये जल उठाने के बाद बिना रुके 24 घंटे के भीतर बाबाधाम पहुंचकर जल अर्पण करते हैं। डाक बमों की गति तेज़ होती है और इनकी यात्रा अनुशासन और सहनशक्ति की मिसाल होती है।
3. दांडी बम
दांडी बम दंडवत प्रणाम करते हुए यात्रा करते हैं। ये श्रद्धालु जमीन पर लेट-लेट कर, हर दंड के बाद आगे बढ़ते हैं। इनकी यात्रा पूर्ण होने में दो से तीन महीने लगते हैं। इनकी आस्था, तपस्या और संकल्प अत्यंत विलक्षण होता है।
4. खड़ी कांवर वाले कांवरिया
ये कांवरिया जल उठाने के बाद कांवर को जमीन पर नहीं रखते। जब वे भोजन करते हैं या आराम करते हैं, तब कोई दूसरा कांवरिया उनके कांवर को कंधे पर उठाए खड़ा रहता है। इसे “खड़ी कांवर” की परंपरा कहा जाता है, जो अत्यधिक संयम और भक्ति की मांग करती है।
श्रावणी मेला में इन विविध प्रकार के कांवरियों की उपस्थिति इस धार्मिक यात्रा को अत्यंत रंग-बिरंगा और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाती है। हर कांवरिया अपनी श्रद्धा, सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार भगवान शिव के दर्शन को निकलता है।


