गहन मतदाता पुनरीक्षण के खिलाफ गांधी शांति प्रतिष्ठान की बैठक, कहा – लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला

भागलपुर, 8 जुलाई: गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र, भागलपुर की कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति की एक अहम बैठक आज प्रतिष्ठान कार्यालय में वासुदेव भाई की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में आगामी कार्ययोजनाओं के साथ-साथ निर्वाचन आयोग द्वारा चलाए जा रहे सघन मतदाता पुनरीक्षण कार्यक्रम पर विशेष चर्चा हुई।

बैठक में मौजूद सभी सदस्यों ने इस प्रक्रिया को अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह का पुनरीक्षण अभियान जनतंत्र की मूल भावना के विपरीत है। सदस्यों का मत था कि इससे बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, विशेषकर प्रवासी, गरीब और हाशिए पर बसे नागरिक, जिनके पास मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।

संजय कुमार ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा, “सघन पुनरीक्षण के नाम पर जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उससे 20 से 30 प्रतिशत मतदाता, जो फिलहाल अपने गृह क्षेत्र से बाहर हैं, वंचित हो सकते हैं। यह उनके मताधिकार को छीनने जैसा है।”

डॉ. मनोज मिता ने इस प्रक्रिया की तुलना “वोटबंदी” से करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र को राजशाही की ओर ले जाने वाला कदम है। उन्होंने इसे नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर हमला बताया और इस पूरी प्रक्रिया को अविलंब रद्द करने की मांग की।

सदस्यों ने सरकार से अपील की कि वह सिर्फ मतदाता जोड़ने पर केंद्रित अभियान चलाए, ताकि कोई भी पात्र नागरिक अपने अधिकार से वंचित न हो।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 13 जुलाई को “मतदाता जागरूकता एवं मौलिक अधिकार” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित कर व्यापक जनजागरण किया जाएगा।

बैठक में अरविंद कुमार रामा, डॉ. हबीब मुर्शीद खां, मोहम्मद रिजवान खान, अनीता शर्मा, मृत्युंजय चौधरी, संजीव कुमार शर्मा और प्यारी देवी समेत कई प्रमुख सदस्य उपस्थित थे। सभी ने एकमत से सरकार की इस नीति की आलोचना की और इसे जनविरोधी बताया।


 

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