पटना, 08 जुलाई 2025 – राज्य में लगातार बढ़ती बिजली खपत को देखते हुए बिहार सरकार ने केंद्र सरकार से 2100 मेगावाट अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने की मांग की है। यह बिजली देश-विदेश की पनबिजली परियोजनाओं से उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर से आग्रह किया है कि नेपाल और भूटान में निर्माणाधीन पनबिजली परियोजनाओं से बिहार को प्राथमिकता दी जाए। इन दोनों देशों की भौगोलिक निकटता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार का मानना है कि इससे बिजली आपूर्ति में स्थायित्व आएगा।
बिजली की मौजूदा स्थिति
- बिहार में अधिकतम बिजली खपत: 8400 मेगावाट से अधिक
- औसत दैनिक आपूर्ति: लगभग 7000 मेगावाट
- ऊंची मांग वाली अवधि: जुलाई से सितंबर (मानसून और कृषि सीजन)
राज्य को इन महीनों में बाजार से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ती है, जिससे लागत बढ़ जाती है। यदि केंद्रीय कोटे से बिजली मिल जाए, तो यह आर्थिक रूप से अधिक व्यावहारिक होगा।
कहां से मांगी गई है बिजली?
- भूटान की पुनातसांगचू पनबिजली परियोजना से 206 मेगावाट (कुल उत्पादन का 40.46%)
- नेपाल की अरुण परियोजना से
- अरुणाचल प्रदेश की कलाई-दो, हियो और टाटो-एक परियोजनाओं से 1426 मेगावाट
- केंद्रीय अनिर्गत कोटे से जुलाई–सितंबर अवधि के लिए 500 मेगावाट
बैट्री भंडारण और वितरण परियोजनाओं के लिए मदद की मांग
बिहार ने 2000 मेगावाट प्रति घंटा बैट्री भंडारण परियोजना के लिए भी केंद्र से आर्थिक मदद मांगी है। यह पीक आवर (शाम 6 बजे से रात 11 बजे) के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं की उच्च खपत को संतुलित करने में सहायक होगी।
साथ ही, आरडीएसएस (पुनरोत्थान वितरण क्षेत्र योजना) के अंतर्गत पटना में सब-स्टेशन, भूमिगत केबल और अन्य वितरण योजनाओं पर काम के लिए डीपीआर केंद्र को भेजी जा चुकी है। नवीनगर से पटना तक बिजली आपूर्ति की योजना को कार्यान्वित करने हेतु भी अतिरिक्त राशि की मांग की गई है।
राज्य सरकार का मानना है कि केंद्र के सहयोग से बिहार में बिजली संकट से राहत मिल सकती है और विकास योजनाओं को गति दी जा सकती है।


