पटना, 6 जुलाई | ब्यूरो रिपोर्ट: बिहार की सियासत में शनिवार को तब हलचल मच गई जब जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जायसवाल पर गंभीर आरोप लगाए। PK ने दावा किया कि किशनगंज स्थित माता गुजरी मेडिकल कॉलेज (MGM) पर दिलीप जायसवाल ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है। साथ ही उन्होंने इस पूरे मामले में राजद, जदयू और भाजपा नेताओं की मिलीभगत का आरोप भी लगाया।
बीजेपी का पलटवार: ‘आरोप झूठे और दुर्भावनापूर्ण’
PK के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि ये पूरी तरह से बेबुनियाद और तथ्यहीन हैं। पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रमुख दानिश इकबाल ने कहा:
“प्रशांत किशोर द्वारा लगाए गए सभी आरोप दुर्भावनापूर्ण हैं। यह एक सोची-समझी साजिश है जिसका मकसद प्रदेश अध्यक्ष की छवि को धूमिल करना है। हम जल्द ही तथ्यों के साथ जवाब देंगे।”
उन्होंने कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन बिना आधार के किसी की साख पर कीचड़ उछालना निंदनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल्द ही दिलीप जायसवाल स्वयं प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तथ्यों सहित पूरा पक्ष रखेंगे।
PK का आरोप: ‘क्लर्क से डायरेक्टर बने, परिवार को ट्रस्ट में बैठाया’
प्रशांत किशोर ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि दिलीप जायसवाल ने MGM कॉलेज में क्लर्क पद से शुरुआत कर बाद में संस्थापक ट्रस्टियों को बाहर कर खुद को निदेशक बना लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि:
“बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने किशनगंज के अल्पसंख्यक कॉलेज पर गैरकानूनी रूप से कब्जा कर लिया। राबड़ी देवी के शासनकाल में ही यह कब्जा हुआ और बाद में बेटे व बहू को भी ट्रस्ट में शामिल कर लिया गया।”
PK ने सवाल उठाया कि इतने बड़े ट्रस्ट परिवर्तन में भाजपा, जदयू और राजद तीनों खामोश क्यों रहे, और इसे साझे स्वार्थों की राजनीति बताया।
आगे क्या?
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दिलीप जायसवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर क्या तथ्य सामने लाते हैं। साथ ही, यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार या कोई जांच एजेंसी इस विवाद में हस्तक्षेप करती है या नहीं। फिलहाल जन सुराज ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस मामले को सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ने के लिए तैयार है।
यह मामला न सिर्फ एक मेडिकल कॉलेज के मालिकाना हक का, बल्कि बिहार की राजनीति की पारदर्शिता और संस्थागत ईमानदारी पर भी बड़ा सवाल है।


