नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति की मौत उसकी अपनी लापरवाही या तेज रफ्तार वाहन चलाने के कारण होती है, तो बीमा कंपनियां उसके परिजनों को मुआवजा देने के लिए बाध्य नहीं होंगी।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने उस मामले में की जिसमें एक सड़क हादसे में मारे गए व्यक्ति के परिजनों — पत्नी, पुत्र और माता-पिता — ने 80 लाख रुपये का मुआवजा मांगा था। पीठ ने यह कहते हुए मुआवजे की मांग को खारिज कर दिया कि जब दुर्घटना मृतक की लापरवाही या तेज गति से वाहन चलाने के कारण हुई हो, तो बीमा कंपनी पर मुआवजे की कोई बाध्यता नहीं बनती।
शीर्ष अदालत ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के 23 नवंबर 2023 के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। उच्च न्यायालय ने भी मृतक के परिजनों द्वारा दायर मुआवजा याचिका को खारिज कर दिया था।
इस फैसले को बीमा दावों की दृष्टि से एक मिसाल माना जा रहा है, जिससे भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को दिशा मिल सकती है।


