अब कंप्यूटर सीखेंगे बिहार की जेलों में बंद कैदी: डिजिटल स्किल्स से जुड़े कोर्स की शुरुआत

पटना, जून 2025 – बिहार सरकार ने एक सराहनीय पहल करते हुए राज्य की जेलों में बंद कैदियों को डिजिटल साक्षरता और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण देने की योजना शुरू की है। गृह विभाग के अंतर्गत कारा एवं सुधार सेवाएँ निरीक्षणालय ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) के साथ एक अहम समझौता किया है।

इस साझेदारी के तहत कैदियों को MS Word, Tally, PowerPoint जैसे प्रासंगिक कंप्यूटर कोर्स का प्रशिक्षण मिलेगा, ताकि वे रिहाई के बाद रोजगार या स्वरोजगार के जरिए समाज की मुख्यधारा में पुनः शामिल हो सकें।

प्रथम चरण में 8 केंद्रीय कारा और 41 जेलों में होगी शुरुआत

कार्यक्रम का प्रथम चरण बिहार की 8 केंद्रीय जेलों और कुल 41 जेल परिसरों में शुरू किया जा रहा है। इसके लिए सरकार ने लगभग ₹2.25 करोड़ की राशि स्वीकृत की है, जिससे 250 कंप्यूटर सेट, UPS, और कंप्यूटर टेबल की खरीद की जाएगी।

प्रमुख आवंटन इस प्रकार हैं:

  • पटना (बेऊर आदर्श केंद्रीय कारा): 15 कंप्यूटर सेट
  • बक्सर, मोतिहारी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, भागलपुर, गया: 10-10 सेट
  • 33 मंडल काराएं: 5-5 सेट

भविष्य में इस योजना को राज्य की सभी 59 जेलों में विस्तार देने की योजना है।

प्रशिक्षण से क्या लाभ होंगे?

प्रशिक्षण में शामिल होंगे:

  • MS Word – डॉक्यूमेंट प्रोसेसिंग और ऑफिस वर्क
  • Tally – अकाउंटिंग और फाइनेंस मैनेजमेंट
  • PowerPoint – प्रेजेंटेशन और बिजनेस रिपोर्टिंग

यह कोर्स 18-45 वर्ष की आयु के कैदियों को उनकी रुचि और योग्यता के आधार पर दिया जाएगा। प्रशिक्षक NIELIT के अनुभवी और प्रमाणित प्रोफेशनल होंगे।

‘मुक्ति’ ब्रांड के तहत स्वरोजगार का रास्ता

सिर्फ डिजिटल स्किल ही नहीं, कैदियों को जेल परिसर में लघु उद्योगों से भी जोड़ा जा रहा है। ‘मुक्ति’ नामक ब्रांड के तहत कैदी बना रहे हैं:

  • सरसों का तेल
  • मसाला पाउडर
  • वुडेन डेकोरेटिव आइटम
  • जूट की सामग्री
  • डिज़ाइनर ड्रेस

ये उत्पाद खुले बाजार में बेचे जा रहे हैं, जिससे कैदियों की आय में वृद्धि हो रही है और जेल के वातावरण में सकारात्मकता आ रही है।

रिहाई के बाद बेहतर जीवन की ओर कदम

इस पहल का उद्देश्य सिर्फ सजा देना नहीं, बल्कि पुनर्वास और सुधार को प्राथमिकता देना है। डिजिटल प्रशिक्षण और व्यावसायिक कौशल के ज़रिए कैदी:

  • रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बन सकेंगे
  • अपराध की पुनरावृत्ति की संभावना होगी कम
  • समाज में सम्मानजनक जीवन जीने की राह आसान होगी

कुछ चुनौतियाँ भी सामने

इस योजना के समक्ष बिजली की उपलब्धता, इंटरनेट कनेक्टिविटी, और प्रशिक्षण कक्षों की कमी जैसी चुनौतियाँ हैं। साथ ही, ‘मुक्ति’ ब्रांड के उत्पादों की व्यापक मार्केटिंग की भी आवश्यकता है, ताकि उनका व्यापार और लाभ दोनों बढ़ सकें।

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