पटना/गोपलगंज। सऊदी अरब की एक निजी निर्माण कंपनी में काम कर रहे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के करीब 300 मजदूर बीते आठ माह से फंसे हुए हैं। न तो उन्हें वेतन मिल रहा है और न ही भोजन जैसी बुनियादी सुविधाएं। अब उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर भारत सरकार और राज्य सरकारों से मदद की गुहार लगाई है।
मजदूरों के मुताबिक कंपनी ने उन्हें न सिर्फ बकाया वेतन देने से इनकार कर दिया है, बल्कि घर लौटने की अनुमति भी नहीं दी गई है। उनमें से कई मजदूरों ने अपने परिजनों को वीडियो कॉल और संदेश भेजकर अपनी दयनीय स्थिति साझा की है।
गोपलगंज, सीवान और यूपी-बंगाल के मजदूर शामिल
वीडियो संदेश भेजने वाले मजदूरों में गोपलगंज, सीवान और छपरा के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के श्रमिक शामिल हैं।
गोपलगंज के थावे, धमपाकड़, फतेहपुर और भगवानपुर एकडंगा गांवों के कई मजदूर इस संकट से जूझ रहे हैं।
फंसे हुए मजदूरों में शामिल नाम:
- राजकिशोर कुमार (धमपाकड़)
- बलिंदर सिंह (भगवानपुर एकडंगा)
- दिलीप कुमार चौहान (फतेहपुर दीघा)
- शैलेश कुमार चौहान (राजेंद्र नगर, गोपालगंज)
- ओमप्रकाश सिंह (बालेपुर बथुआ बाजार)
- उमेश साह, रवि कुमार, राजीव रंजन, हरिंदर चौहान (सीवान)
भूखमरी की कगार पर मजदूर, दूतावास से नहीं मिली मदद
मजदूरों का आरोप है कि बीते आठ माह से वेतन नहीं मिला, और अब भोजन भी पूरी तरह बंद कर दिया गया है। उनके अनुसार, उन्होंने कई बार भारतीय दूतावास से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन अब तक कोई ठोस मदद नहीं मिली।
वीडियो संदेश में मजदूरों ने साफ कहा है कि अगर जल्द ही कोई कार्रवाई नहीं की गई, तो उनकी स्थिति और बिगड़ सकती है।
1994 से सक्रिय कंपनी, यानबू है मुख्यालय
जिस निजी कंपनी में ये श्रमिक काम कर रहे हैं, उसका मुख्यालय सऊदी अरब के यानबू शहर में है। यह कंपनी तेल, गैस, बिजली और परिवहन क्षेत्र में सेवाएं देती है और 1994 से सक्रिय है।
श्रमिकों का कहना है कि शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन बीते कई महीनों से हालात बिगड़ते चले गए।
परिजनों ने सांसद को सौंपा आवेदन, सरकार से अपील
फंसे हुए मजदूरों के परिजनों ने गोपालगंज के सांसद डॉ. आलोक कुमार सुमन को आवेदन देकर मदद की गुहार लगाई है। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन से भी अपील की है कि वे विदेश मंत्रालय से संपर्क कर स्वजनों की सकुशल वापसी सुनिश्चित कराएं।
परिजनों का कहना है, “हम हर दिन चिंता में जी रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करे और हमारे लोगों को सुरक्षित घर वापस लाए।”
यह मामला प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा और विदेशों में काम करने वाले भारतीय श्रमिकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


