बिहार: साली ने मांगे 3 हजार रुपये तो भड़क गया दूल्हा, शादी में मच गया बवाल; वायरल हुआ वीडियो

पूर्णिया, बिहार।

शादी के जश्न के बीच एक मामूली सी रस्म ने ऐसा तूल पकड़ लिया कि शादी का माहौल हंगामे और मारपीट में बदल गया। मामला पूर्णिया जिले के कसबा थाना क्षेत्र अंतर्गत दियारी गांव का है, जहां द्वार छेकाई की रस्म के दौरान 3 हजार रुपये की मांग पर दूल्हा और दुल्हन पक्ष के बीच जमकर बवाल हो गया। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों में मारपीट तक हो गई। इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शादी की रस्मों के तहत जब दूल्हा बारात लेकर दियारी गांव पहुंचा, तो दुल्हन पक्ष की लड़कियों ने परंपरा के अनुसार द्वार छेकाई के दौरान 3 हजार रुपये की मांग की। लेकिन दूल्हा इस पैसे को देने को तैयार नहीं हुआ। इसी बात पर तनातनी शुरू हो गई।

जब दूल्हे ने पैसे देने से इनकार किया, तो दुल्हन पक्ष की ओर से कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे दूल्हे और उसके परिजन गुस्से से लाल हो गए। देखते ही देखते बात विवाद से झगड़े में बदल गई और फिर शादी की खुशी हंगामे और हाथापाई में तब्दील हो गई।

ग्रामीणों ने कराया समझौता, दूल्हा-दुल्हन लेकर रवाना

स्थानीय गांववालों की मदद से मामला शांत कराया गया। उन्होंने दोनों पक्षों को समझाया और किसी तरह माहौल को नियंत्रित किया। बाद में दूल्हा पक्ष बिना ज्यादा विवाद बढ़ाए दूल्हन को लेकर अपने गांव लौट गया।

इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिस पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कोई इस रस्म की आलोचना कर रहा है तो कोई दूल्हे के गुस्से को अनुचित बता रहा है।

स्थानीय प्रशासन की नजर

फिलहाल इस घटना को लेकर कोई आधिकारिक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं की गई है, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन मामले की जांच में जुट गया है। वहीं गांव के बुजुर्गों ने दोनों पक्षों से आपसी तालमेल बनाए रखने की अपील की है।

शादी की परंपराएं या टकराव का कारण?

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या शादी की पुरानी परंपराएं आज के समय में टकराव का कारण बनती जा रही हैं? जहां एक तरफ लोग रस्मों को मनोरंजन मानते हैं, वहीं छोटी सी बात पर बवाल होना कहीं न कहीं सामाजिक समझ की कमी भी दर्शाता है।

“शादी में मज़ाक और रस्मों की मर्यादा होनी चाहिए, वरना जश्न का माहौल बवाल में बदल जाता है।” — ग्रामीण बुजुर्ग

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