संयुक्त राष्ट्र में भारत की मजबूत आवाज! सभी धर्मों के प्रति असहिष्णुता पर कड़ा रुख

क्या आपने कभी सोचा है कि विविधता और बहुलता की भूमि भारत, धार्मिक असहिष्णुता के मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कैसी प्रतिक्रिया देती है? हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। आइए, जानते हैं इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में विस्तार से। भारत: विविधता और बहुलता की भूमि भारत सदियों से विविधता और बहुलता का प्रतीक रहा है। यह देश न केवल हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख जैसे चार प्रमुख धर्मों की जन्मभूमि है, बल्कि यहां इस्लाम, ईसाई, पारसी और यहूदी धर्म के अनुयायी भी सदियों से शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रहे हैं। भारत में लगभग 20 करोड़ मुस्लिम नागरिक निवास करते हैं, जो इसे विश्व में सबसे बड़े मुस्लिम जनसंख्या वाले देशों में से एक बनाते हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत का बयान हाल ही में, संयुक्त राष्ट्र महासभा में इस्लामोफोबिया से मुकाबला करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित एक अनौपचारिक बैठक में, भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने देश की ओर से एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के साथ मिलकर मुसलमानों के खिलाफ धार्मिक असहिष्णुता की घटनाओं की निंदा करता है। साथ ही, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि धार्मिक भेदभाव एक व्यापक चुनौती है, जो सभी धर्मों के अनुयायियों को प्रभावित करती है। सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की आवश्यकता पी. हरीश ने अपने बयान में कहा कि सभी देशों को अपने नागरिकों के प्रति समान व्यवहार करना चाहिए और ऐसी नीतियों से बचना चाहिए जो धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा प्रणाली में ऐसे तत्व नहीं होने चाहिए जो पूर्वाग्रह या कट्टरता को प्रोत्साहित करते हों। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और सहिष्णुता का वातावरण बना रहे। धार्मिक स्थलों पर बढ़ते हमलों पर चिंता भारत ने धार्मिक स्थलों और समुदायों पर बढ़ते हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। पी. हरीश ने कहा कि इन चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सभी सदस्य देशों की निरंतर प्रतिबद्धता और ठोस कार्रवाई आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक असहिष्णुता के खिलाफ लड़ाई सभी रूपों में धार्मिक भेदभाव के खिलाफ व्यापक संघर्ष से अलग नहीं है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव का संदेश संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस अवसर पर कहा कि दुनिया भर में मुसलमानों को भेदभाव, बहिष्कार और हिंसा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक व्यापक असहिष्णुता, उग्र विचारधाराओं और धार्मिक समूहों और कमजोर आबादी पर हमलों का हिस्सा है। गुटेरेस ने सभी से आग्रह किया कि वे कट्टरता, ज़ेनोफोबिया और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाएं। भारत का समावेशी दृष्टिकोण भारत ने इस्लामोफोबिया के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर इस बात पर जोर दिया कि धार्मिक असहिष्णुता केवल एक धर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी धर्मों के अनुयायियों को प्रभावित करती है। इसलिए, यह आवश्यक है कि हम सभी मिलकर एक ऐसे भविष्य की ओर बढ़ें, जहां हर व्यक्ति, चाहे उसका धर्म कोई भी हो, गरिमा, सुरक्षा और सम्मान के साथ जी सके।

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