विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश और धर्म को कमजोर करने में लगा है नेताओं का एक वर्ग : पीएम मोदी

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम में प्रस्तावित कैंसर अस्पताल का शिलान्यास करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि नेताओं का एक वर्ग ऐसा है जो लोगों को तोड़ने में लगा है।

देश में धर्म का उड़ाया जा रहा है मखौल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 218 करोड़ की लागत से लगभग 11 हेक्टेयर क्षेत्र में बनने वाले साइंस और रिसर्च सेंटर का शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आजकल हम देखते हैं कि नेताओं का एक वर्ग ऐसा है जो धर्म का मखौल उड़ाता है, उपहास उड़ाता है और लोगों को तोड़ने में जुटा है। बहुत बार विदेशी ताकतें भी इन लोगों का साथ देकर देश और धर्म को कमजोर करने की कोशिश करते हुए दिखाई देते हैं।

संत, संस्कृति और सिद्धांतों पर किया जा रहा है हमला

उन्होंने आगे कहा कि हिंदू आस्था से नफरत करने वाले ये लोग सदियों से किसी न किसी भेष में रहते हैं। गुलामी की मानसिकता से घिरे हुए ये लोग हमारी मान्यताओं और मंदिरों पर, हमारे संत, संस्कृति और सिद्धांतों पर हमला करते रहते हैं। ये लोग हमारे पर्व, परंपराओं और प्रथाओं को गाली देते हैं। जो धर्म संस्कृति व स्वभाव से ही प्रगतिशील है, उस पर कीचड़ उछालने की हिम्मत दिखाते हैं। हमारे समाज को बांटना, उसकी एकता को तोड़ना ही इनका एजेंडा है।

अब बागेश्वर धाम में भजन, भोजन और निरोगी जीवन का मिलेगा आशीर्वाद 

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री काफी समय से देश में एकता के मंत्र को लेकर लोगों को जागरूक करते रहते हैं। अब उन्होंने समाज और मानवता के हित में एक निर्णय लिया है, इस कैंसर संस्थान के निर्माण की ठानी है। यानी अब बागेश्वर धाम में भजन, भोजन और निरोगी जीवन तीनों का आशीर्वाद मिलेगा। हमारे मंदिर, मठ, धाम एक ओर पूजन और साधना के केंद्र रहे हैं तो दूसरी ओर विज्ञान और सामाजिक चिंतन, सामाजिक चेतना के भी केंद्र रहे हैं।

महाकुंभ में करोड़ों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई

प्रयागराज में चल रहे महाकुंभ की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महाकुंभ की हर तरफ चर्चा हो रही है। महाकुंभ अब पूर्णता की ओर है, अब तक करोड़ों लोग वहां पहुंच चुके हैं। करोड़ों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई है, संतों के दर्शन किए हैं। अगर इस महाकुंभ की तरफ नजर करें तो सहज ही एहसास हो जाता है कि यह एकता का महाकुंभ है। यह 144 साल बाद हुआ। यह महाकुंभ एकता के महाकुंभ के रूप में प्रेरणा देता रहेगा।

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