नहीं चला फिल्मी दिमाग! रिकवरी एजेंट से सीधे बना ‘फर्जी दारोगा’, इंटर परीक्षार्थी से पंगा लेना पड़ा महंगा

बीच सड़क पर खड़ा होकर वाहन चालकों से ना सिर्फ वसूली करता था बल्कि चालान भी करता था. चालान के बदले जुर्माना को ऑनलाइन लेता था.

रिकवरी एजेंट से फर्जी दारोगा: मामला लहेरी थानाक्षेत्र का बताया जा रहा है. दरअसल, शातिर फर्जी दारोगा बना हुआ था. आरोपी की पहचान नूरसराय थाना क्षेत्र नोसरा गांव निवासी संतोष कुमार के तौर पर हुई है. पूछताछ में पता चला कि यह एक लोन कंपनी में रिकवरी एजेंट के तौर पर काम करता है. वाहन चालकों से साजिश के तहत बीच रास्ते में वसूली करता था.

परीक्षार्थी को रोकना पड़ा महंगा: दरअसल, इस्लामपुर थाना क्षेत्र निवासी विपीन कुमार बाइक ने पुलिस से शिकायत की थी. उन्होंने बताया कि वे इंटर की परीक्षा देने जा रहे थे. इसी दौरान रामचंद्रपुर बस स्टैंड के पास कुछ लोग खुद को ट्रैफिक दारोगा बताकर बाइक रोक ली. कोई भी वर्दी नहीं पहने था. पहले तो उक्त आरोपी ने कागजात चेक किया. सारा कागजात रहने के बाद किस्त बकाया रहने की बात कही और 15 हजार का चालान कटाने को कहने लगा.

असली पुलिस को देखते ही भागने लगा: युवक ने बताया कि उसके पास पास मात्र 500 रुपए था. जिसे लेकर शेष रुपए ऑनलाइन देने का युवक पर दबाव बनाने लगा. युवक ने इसके बाद थाना में कॉल किया. सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंच गई. इतने में पुलिस को देखते ही शातिर वहां से भागने लगा. पुलिस ने खदेड़कर आरोपी को पकड़ कर थाना लायी. युवक से पूछताक्ष में पता चला कि वह एक रिकवरी एजेंट है जो फर्जी यातायात दारोगा बनकर यात्रियों से ठगी करता था.

“नकली पुलिस द्वारा इलाके में लगातार वसूली की शिकायत मिल रही थी. सूचना के बाद गश्ती पुलिस ने शातिर को गिरफ्तार किया. आरोपी रिकवरी एजेंट है. जिस बाइक को रोका गया था उस पर 15 हजार का किस्त बकाया है. बाइक सवार ने नकली पुलिस बनकर वसूली करने का आवेदन दिया है. जिसके आधार पर केस दर्ज किया गया है और आगे की कार्रवाई की जा रही है. शातिर के पास से वसूली के 18000 नगद बरामद हुए हैं.” -रंजीत कुमार रजक, लहेरी थानाध्यक्ष

मिथलेश मांझी की खूब हुई थी चर्चा: बता दें कि इससे पहले बिहार में कई फर्जी पुलिस पदाधिकारी का मामला सामने आ चुका है. हाल में एक मामला जमुई से आया था जहां मिथलेश मांझी नामक युवक फर्जी आईपीएस की वर्दी पहने घूम रहा था. पुलिस ने गिरफ्तार किया था. पूछताछ में पता चला था कि उसे 2 लाख रुपए में पुलिस की नौकरी मिली है. उसने एक मास्टरमाइंड का भी नाम लिया था लेकिन वह फर्जी निकला था.

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