पहले दिन पेपर देने से वंचित हुई लड़की तो पहुंची मानवाधिकार आयोग, लगाया 1 साल बर्बाद करने का आरोप

यह घटना जिले के नितीश्वर महाविद्यालय परीक्षा केंद्र की है, जहां परीक्षा से कुछ समय पहले ही मुख्य द्वार को बंद कर दिया गया था. पीड़ित छात्रा रत्न प्रिया का कहना है कि वह समय पर केंद्र पर पहुची थी, लेकिन मुख्य द्वार बंद होने के कारण उसे परीक्षा में बैठने का मौका नहीं मिला.

परीक्षा केंद्र के अधिकारियों द्वारा भेदभाव : रत्न प्रिया ने बताया कि जब वह परीक्षा केंद्र पर पहुंची, तो देखा कि मुख्य द्वार बंद किया जा रहा था, जबकि घड़ी में पांच मिनट का समय बचा हुआ था. उपस्थित पुलिसकर्मियों और केंद्राधीक्षक ने उसे अंदर प्रवेश करने से रोक दिया, जबकि अन्य छात्र-छात्राओं को प्रवेश की अनुमति दी गई. उन्होंने काफी प्रयास किया, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई. इसके बाद, छात्रा ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली.

मानवाधिकार अधिवक्ता ने दायर किया परिवाद : इस मामले में पीड़ित छात्रा ने मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा के माध्यम से राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग में परिवाद दायर किया है. अधिवक्ता ने इसे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए कहा कि इस घटना के कारण छात्रा का एक साल बर्बाद हो गया, जो पूरी तरह से अनुचित है. उन्होंने मामले में जल्द न्याय की उम्मीद जताई और आयोग से न्याय दिलाने की अपील की.

देर से आने वाले परीक्षार्थियों को No Entry : गौरतलब है कि परीक्षाकेंद्र में देर से आने वाले परीक्षार्थियों को रोक दिया गया था. गोपालगंज, गया समेत कई जिलों से इस तरह की खबरें आईं. परीक्षार्थी गेट पर सिर पटकते रहे लेकिन उन्हें भीतर जाने की परमीशन नहीं दी गई. अभिभावक भी उग्र हो गए लेकिन किसी भी सूरत में परीक्षार्थियों को एंट्री नहीं दी गई. कुछ सेंटर पर परीक्षार्थियों ने सीढ़ी लगाकर घुसने की कोशिश की. कुछ सफल भी हो गए लेकिन केंद्राधीक्षक द्वारा सभी को बाहर कर दिया गया.

शनिवार से शुरू हुई है परीक्षा : बता दें कि बिहार में आज इंटरमीडिएट की परीक्षा थी. इंटरमीडिएट परीक्षा में इस बार प्रदेश के 1677 परीक्षा केंद्रों पर 12.92 लाख परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं. परीक्षा केंद्र में समय से पहले पहुंचने पर ही पेपर देने की अनुमति दी जाएगी. लेकिन जिस तरह से 2-2 मिनट के लिए परीक्षार्थिों को पेपर देने से रोका जा रहा है उसको लेकर थोड़ा अभिभावकों में भी रोष है.

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