नीतीश राज में रिटायर्ड IAS अफसर हैं भाग्य विधाता ! नियमित की जगह नियोजित J.S. के भरोसे विज्ञान प्रावैधिकी विभाग, चहेते को सेट करने की पूरी फाईल आ गई बाहर

बिहार में सुशासन की सरकार है. हालांकि इस राज में अफसरशाही चरम पर है. चहेते को सेट करने के लिए तरह-तरह के हथकंड़े अपनाये जाते हैं. रिटायरमेंट के बाद अधिकारियों को मलाईदार जगह दी जाती है. विपक्ष बार-बार यह सवाल उठाया है कि रिटायर अधिकारी सरकार चला रहे. मंत्रियों की कुछ चलती नहीं है. आरटीआई के जानकारी निकलकर सामने आई है वो चौकाने वाली है. रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के नियोजन और पावर देने को लेकर परामर्श को भी भूला दिया गया. हद तो तब हो गई जब बिहार कैबिनेट के प्रस्ताव को बदलकर उक्त अधिकारी को नियोजित किया गया. कैबिनेट का प्रस्ताव बदलकर नियोजन कराने के खुलासे के कुछ दिन बाद विभाग के स्तर से लिपिकीय भूल बताकर शुद्धि पत्र जारी कर मामले को खत्म कराने की कोशिश की गई. हालांकि सवाल आज भी बरकरार है. वर्तमान में विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग में सिर्फ 1 संयुक्त सचिव हैं, वो भी नियोजन वाले गजेन्द्र कुमार मिश्रा. क्या संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारियों की बिहार में कमी हो गई है जो आज तक उस विभाग में पदस्थापित नहीं किया गया ?

आरटीआई से गजेन्द्र कुमार मिश्रा(IAS) के नियोजन की पूरी फाईल आ गई बाहर 

एक आरटीआई कार्यकर्ता सलिल कुमार सिंह ने 17 जनवरी 2023 को विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के लोक सूचना पदाधिकारी से जानकारी मांगी थी. इस संबंध में 12 जनवरी 2024 को विभाग ने सूचना उपलब्ध कराई. दरअसल, आवेदक ने आईएएस अफसर गजेन्द्र कुमार मिश्रा (2010) के संविदा नियोजन की पूरी प्रक्रिया से संंबधित कागजात की मांग की थी.

 30 अक्टूबर को रिटायर हुए आईएएस अफसर, 1 नवंबर 2023 से फिर से उसी पोस्ट पर 

विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की तरफ से जो जानकारी दी गई है, उसमें कहा गया है कि गजेंद्र कुमार मिश्रा 2010 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. ये विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग में संयुक्त सचिव हैं. इनकी सेवा निवृत्ति की तिथि 31.10.2023 थी. इसके बाद इस पद के विरुद्ध संविदा पर अगले दो वर्ष या नियमित पदस्थापन होने तक के लिए जो पहले हो तक के लिए नियोजित किए जाने तथा पदीय शक्तियों एवं दायित्व के निर्माण के लिए पूर्व से निर्धारित सभी सुविधा देने संबंधी प्रस्ताव मंत्रिमंडल में भेजे जाने के लिए विभागीय मंत्री से अनुमोदन प्राप्त करना है. फाईल नीचे से बढ़ी जिस पर विभागीय सचिव ने 20 सितंबर 2023 को इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दिया और फाईल विभागीय मंत्री को भेजी. मंत्री ने 26 सितंबर 2023 को प्रस्ताव पर सहमत होते हुए मुहर लगा दी.

रिटायर्ड आईएएस अफसर गजेन्द्र मिश्रा के बिना काम संभव नहीं….

गजेन्द्र कुमार मिश्रा (2010) के संविदा नियोजन करना विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने जरूरी बताया था. विभाग ने तब बताया था कि बिहार कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से निम्न वर्गीय लिपिक एवं कार्यालय परिचारी की नियुक्ति कराई जानी है. बिहार कर्मचारी चयन आयोग से संबंध स्थापित कर नियुक्ति कार्रवाई किए जाने के लिए इनका संविदा नियोजन आवश्यक है. भविष्य की आवश्यकता को देखते हुए इनका संयुक्त सचिव के पद पर आगे भी बने रहना विभाग के हित में श्रेष्ठकर होगा. विभाग के इस प्रस्ताव पर विभागीय सचिव और मंत्री ने मुहर लगा दी.

 संविदा नियोजन किया जाना नियम सम्मत नहीं-GAD

हालांकि, सामान्य प्रशासन विभाग ने विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को दिए अपने परामर्श में कहा था कि विभागीय़ संकल्प सं- 1000, (10.7.2015) की कंडिका-6 के प्रावधान के आलोक में बिहार सरकार के सेवानिवृत्त कर्मियों का ही संविदा नियोजन संभव है. विचाराधीन प्रस्ताव चूंकि गजेंद्र कुमार मिश्रा का है,जो भारतीय प्रशासनिक सेवा के पदाधिकारी हैं. ऐसे में इनकी सेवानिवृत्ति के बाद कंडिका-6 में वर्णित प्रावधान के आलोक में संविदा नियोजन किया जाना नियमसम्मत नहीं होगा. हालांकि सामान्य प्रशासन विभाग ने विभाग को कुछ हद तक छूट दी.

कैबिनेट ने नियमित पदस्थान होने तक नियोजन की दी थी स्वीकृति 

सामान्य के परामर्श को दरकिनार करते हुए विभाग ने गजेन्द्र कुमार मिश्रा के नियोजन को लेकर प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा. बिहार कैबिनेट की बैठक10 अक्टूबर 2023 को हुई. जिसमें विज्ञान प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रस्ताव गजेंद्र कुमार मिश्रा (भारतीय प्रशासनिक सेवा 2010 बैच) संयुक्त सचिव को इनकी सेवानिवृत्ति की तिथि 31.10. 2023 के बाद इस पद के विरुद्ध संविदा पर अगले दो वर्ष या नियमित पदस्थापन होने तक के लिए नियोजन की स्वीकृति दी.

पत्र में नियमित पदस्थापन की जगह नियमित प्रोन्नति लिखा, इसी आधार पर कर ली ज्वाइनिंग  

नीतीश कैबिनेट की स्वीकृति मिलने के बाद विज्ञान एवं प्रावैधिकी विभाग ने प्रस्ताव को बदलते हुए उल्लेख किया कि नियमित प्रोन्नत्ति होने तक गजेंद्र कुमार मिश्रा संयुक्त सचिव के पद पर रहेंगे. जबकि कैबिनेट ने नियमित पदस्थापन होने तक या 2 वर्ष जो पहले हो के लिए नियोजन की स्वीकृति दी थी. गजेन्द्र कुमार मिश्रा ने 1 नवंबर 2023 को नियमित प्रोन्नति होने तक वाली चिट्ठी के आधार पर ही विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर ज्वाइनिंग ले ली. जब विभाग की पोल खुली इसके बाद 11 नवंबर 2023 को शुद्धि पत्र जारी किया गया . जिसमें कहा गया की 17 अक्टूबर 2023 को जारी विभागीय अधिसूचना में लिपिकीय त्रुटि के कारण कंडिका-1 में अंकित नियमित प्रोन्नति होने के स्थान पर नियमित प्रदस्थापन होने तक पढ़ा जाए.

बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग में संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी नहीं थे ? अगर थे तो वे काम करने में सक्षम नहीं थे ? जब गजेन्द्र कुमार मिश्रा (IAS) को रिटाय़रमेंट के बाद फिर से नियोजन करने की फाईल दौड़ रही थी, उस समय इनके अलावे दो अन्य संयुक्त सचिव पदस्थापित थे. उदाहरण सामने है. 6 जनवरी 2023 को विभाग की तरफ से प्रतिस्थानी को लेकर जो पत्र जारी हुआ था, उसमें तीन संयुक्त सचिव थे. पहला गजेंद्र कुमार मिश्रा, दूसरे नंबर पर अरुण कुमार सिंह और तीसरे संयुक्त सचिव इबरार आलम. गजेन्द्र कुमार मिश्रा (IAS)  के रिटायरमेंट के बाद संविदा पर अगले दो वर्ष या नियमित पदस्थापन होने तक के लिए नियोजन की स्वीकृति नीतीश कैबिनेट से मिलने के तीन दिन पहले ( 7 OCT 2023) विभागीय संयुक्त सचिव अरूण कुमार सिंह को स्थानांतरित कर राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव के पद पर पदस्थापित कर दिया गया.

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