रेलमंत्री रहकर भी ‘नालंदा रेलवे स्टेशन’ का विकास नहीं कर सके नीतीश कुमार, आज भी यात्री सुविधाओं का है घोर अभाव

देश की आज़ादी के बाद बिहार से तकरीबन 8 लोग रेल मंत्री बने। इस दौरान भारत में रेलवे का अभूतपूर्व विकास हुआ। बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी कभी देश के रेलमंत्री का पद सुशोभित कर चुके है। नीतीश कुमार का गृह जिला नालंदा है, जिसके विकास का कोई कोर कसर नीतीश कुमार ने बाकी नहीं छोड़ा है। लेकिन जैसे ही बात जिले में रेल सुविधाओं की आती है। यह काफी पिछड़ा हुआ नजर आता है। केवल नालंदा रेलवे स्टेशन की बात करें तो यह आज भी यात्री सुविधाओं की बेसब्री से इंतजार कर रहा है। जबकि इस रेलवे स्टेशन की अहमियत विश्व स्तर की है।

विश्व धरोहर नालंदा खण्डर जाने के लिए देश विदेश के पर्यटक इसी स्टेशन पर उतरते हैं। इसके आसपास ही कई महत्वपूर्ण संस्थान हैं,जिसमें नालंदा विश्वविद्यालय, संग्रहालय, नव नालंदा महाविहार तथा ह्वेनसांग मेमोरियल हॉल देख सकते हैं। इसके अलावा इसके आस-पास में भी घूमने के लिए बहुत से पर्यटक स्‍थल शामिल है। इसके बावजूद स्टेशन पर एक ओवरब्रिज तक नहीं है। जिसका खामियाजा यहां आनेवाले यात्रियों और पर्यटकों को भुगतना पड़ता है। न ही रेलवे सुरक्षा गार्ड न हीं यहां पीने की पानी की सुविधा है और न हीं शौचालय की।

जब स्थानीय लोगों से पूछताछ की तो उनका कहना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार नालंदा को भले ही विश्व पटेल पर ला कर रख दिया हो। लेकिन नालंदा का यह रेलवे स्टेशन आज भी विकास की बाट तक जोह रहा है। यहां सुरक्षा गार्ड ना होने के कारण आए दिन बड़ी-बड़ी दुर्घटनाएं घटती है। चोरी, छिनतई, लूटपाट होते रहती है। यही नहीं ओवरब्रिज ना होने के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है। खास तौर पर महिलाएं जिन्हें शारीरिक कष्ट रहती है, वह भी काफी मशक्कत करने के बाद प्लेटफार्म पर चढ़ पाती हैं।

आमतौर पर देखा जाए तो यहां के यात्री बुनियादी सुख सुविधा दूर-दूर तक वंचित रहते है। इस जिले के निवासी नीतीश कुमार खुद रेल मंत्री रह चुके हैं। वर्तमान में नालंदा से श्रवण कुमार जो लगातार बिहार सरकार में मंत्री हैं। फिर भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। रेलवे स्टेशन से सटे बाईपास तक जाने का रास्ता भी बंजर पड़ा है उसे भी मरम्मत करने की बेहद जरुरत है।

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