भिखारी, ऑटोवाला और कबाड़ी… ने की दरिंदगी, दिल्ली हुई शर्मसार

दिल्ली से एक बार फिर ऐसी घटना सामने आई है जिसने ओडिशा से लेकर देश की राजधानी तक हड़कंप मचा दिया है।

यहां तीन लोगों ने एक युवती के साथ गैंगरेप किया फिर उनमें से एक उसे अपने साथ ले गया और उसके साथ दुष्कर्म कर लहूलुहान हालत में उसे सड़क किनारे फेंक फरार हो गया। युवती की हालत इतनी खराब थी कि वह पुलिस जांच में सहयोग भी नहीं कर पा रही थी। छोटे-छोटे हिंट के आधार पर दिल्ली पुलिस करीब 21 दिन बाद तीनों आरोपियों तक पहुंची। अब जाकर दिल्ली पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा किया है, जिससे युवती के साथ हुई दरिंदगी की पूरी कहानी सामने आई है।

दक्षिणी पूर्वी जिला पुलिस ने ओडिशा की युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने वाले तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। इन दरिंदों में कबाड़ी, भिखारी और ऑटो चालक शामिल हैं। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपितों ने युवती के साथ हैवानियत की सारी हदें पार कर दी। इन्होंने दिल्ली पुलिस के पुराने मुख्यालय से कुछ मीटर की दूरी पर पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। बार-बार हुई हैवानियत से युवती का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। पुलिस ने वारदात में प्रयोग ऑटो को भी जब्त कर लिया है। बता दें कि 10 अक्टूबर की देर रात करीब तीन बजे एक नौसेना अधिकारी ने पुलिस को सूचना दी थी कि सराय काले खां इलाके में एक युवती गंभीर हालत में है। युवती के शरीर से खून बह रहा है।

पुलिस ने युवती को गंभीर हालत में एम्स में भर्ती कराया था। पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। आरोपितों ने उसे अर्धनग्न अवस्था में सराय काले खां फेंक दिया था। पुलिस ने 21 दिन बाद तीन आरोपितों ऑटो चालक प्रभु, कबाड़ी की दुकान पर काम करने वाला प्रमोद और शमशुल लंगड़ा को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपितों से वारदात में प्रयोग ऑटो, पीड़िता के खून से सने कपड़े व शातिरों के कपड़े बरामद किए हैं। आरोपी प्रभु महतो मूलरूप से बिहार के मोतिहारी स्थित गांव गायघाट का रहने वाला है। वर्तमान में कोटला मुबारकपुर में रहता है। वह दो महीने पहले दिल्ली आया था और ऑटो चलाने लगा। उसके सात बच्चे हैं। वह छठ पूजा की पूर्व संध्या पर दिल्ली छोड़कर बिहार फरार होने की फिराक में था। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर स्थित गांव अमरतार निवासी आरोपित प्रमोद उर्फ बाबू वर्तमान में नरेला पाकेट चार में रहता है।

वह तिलक ब्रिज रेलवे स्टेशन के पास चांद मोहम्मद की कबाड़ की दुकान पर काम करता है। जबकि दिव्यांग आरोपित मोहम्मद शमसुल उर्फ राजू बिहार के बेगूसराय स्थित बकरी सलोना गांव का रहने वाला है। वर्तमान में गांधीनगर स्थित गुरुद्वारे वाली गली में रहता है। वह भीख मांगता है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि वारदात की रात को परमोद उर्फ बाबू और मोहम्मद शमशुल ने शराब पी। इस दौरान उन्होंने पीड़िता को देख लिया। दोनों आरोपित उसे जबरन सुनसान जगह ले गए और सामूहिक दुष्कर्म किया। तभी आरोपित ऑटो चालक प्रभु ने उन्हें देख लिया। फिर उसने भी पीड़िता को जबरन अपने ऑटो में बैठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। फिर युवती को सराय काले खां फेंककर फरार हो गया। दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त रवि कुमार सिंह ने बताया कि आरोपितों को गिरफ्तार करने के लिए एक महिला सिपाही को सामाजिक कार्यकर्ता बनाकर पीड़िता के पास भेजा गया था, चूंकि सदमे की वजह से युवती घटनास्थल सहित अन्य जानकारी नहीं दे पा रही थी।

एक ओडिशा की महिला को नर्स के रूप में उसकी देखभाल के लिए रखा गया। जब दोनों पर पीड़िता को भरोसा हो गया तो उसने अपने साथ हुई हैवानियत के बारे में बताया। आरोपितों तक पहुंचने के लिए पुलिस की 10 टीमों ने करीब 700 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। इस दौरान 150 से अधिक ऑटो रिक्शा वालों से पूछताछ की गई। तब तीनों शातिर पुलिस के हत्थे चढ़े। वर्तमान में पीड़िता का उपचार एम्स के मनोचिकित्सक विभाग में चला रहा है। एम्स में उसके संवदेनशील अंगों का आपरेशन हुआ है। घटना के बाद से वह गहरे सदमे में है।

इस वजह से मनोचिकित्सक विभाग में भर्ती है। सोशल वर्क में एमए करने वाली पीड़िता नौ मई को अपने स्वजन को बिना बताए दिल्ली आई थी। वह किशनगढ़ थानाक्षेत्र में किराए पर रहती थी। नौकरी नहीं मिलने पर वह कमरा छोड़कर बस स्टाप, रेलवे स्टेशन और फुटओवर ब्रिज के पास रहने लगी। युवती के माता-पिता उसे दिल्ली लेने भी आए थे, लेकिन उसने वापस जाने से इन्कार कर दिया था। इस दौरान उसका मानसिक संतुलन भी बिगड़ गया था।

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