भागलपुर में गरुड़ संरक्षण के लिए जारी हुआ 5000 डाक लिफाफा, भारत का सबसे बड़ा गरुड़ संरक्षण केंद्र है कदवा

भागलपुर जिले में गरुड़ के संरक्षण के लिए विशेष पहल की जा रही है ऐसा इसलिए भी क्योंकि विश्व में विलुप्त होती पक्षियों की गरुड़ प्रजाति की आबादी बिहार के भागलपुर में सबसे अधिक है, भागलपुर जिले के नवगछिया के कदवा में भारत का सबसे बड़ा गरुड़ संरक्षण केंद्र है, साथ ही साथ विश्व का एकमात्र गरुड़ पुनर्वास केंद्र भी भागलपुर में है, यहां झुंड में गरुड़ पक्षी पहुंचते हैं और प्रजनन भी करते हैं, सन 2005 के सर्वे के मुताबिक यहां 75 गरुड़ थे.

जिनकी संख्या बढ़कर अब 500 से भी अधिक हो गई है, गरुड़ पक्षी जिसे सनातन धर्म में भगवान का दर्जा दिया गया है, और भारतीय लोग इसे गरुड़ महाराज बोलते हैं और इसकी पूजा भी करते हैं, ऐसे में वन विभाग के द्वारा गरुड़ के संरक्षण का संदेश जन जन तक पहुँचाने के लिए डाक विभाग के सहयोग से 5 हज़ार डाक लिफाफा जारी किया गया है, जिसके ऊपर गरुड़ पक्षी की तस्वीर और उसे संरक्षण देने का संदेश छपा हुआ है।

वन्यजीव संरक्षक अरविंद मिश्रा ने बताया कि इंसान के जीवन में भी पशु पक्षियों की अहम भूमिका है, खासकर गरुड़ पक्षी को भगवान का दर्जा दिया गया है, और विश्व भर में यह प्रजाति विलुप्त होने के कगार पर है इसलिए इसका संरक्षण करना हम सभी का कर्तव्य है, हम अपनी आने वाली पीढ़ी को भी इसके बारे में बता सके इसलिए भी हमें इसे संरक्षित करना होगा, इसी दिशा में हम लोगों ने डाक विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर जिला वन पदाधिकारी भरत चिन्तापल्ली के द्वारा 500 डाक लिफाफा को छपवाया है, जिसमें 300 लिफाफा डाक विभाग को दिया गया है।

डीएफओ भरत चिन्तापल्ली ने बताया कि इस खास लिफाफा के माध्यम से गरुड़ संरक्षण में हमें मदद मिलेगा डाक के माध्यम से या लिफाफा जहां भी पहुंचेगी वहां तक गरुड़ संरक्षण का संदेश भी जाएगा, इसलिए भी या पहल की गई है, साथ ही साथ गरुड़ संरक्षण के लिए कई संगठन भी अब आगे आए हैं और गरुड़ की रक्षा में अपना योगदान दे रहे हैं, गरुड़ सेविका संगठन को हम लोगों ने सम्मानित भी किया है।

मंदार नेचर क्लब के अध्यक्ष तपन घोष ने बताया कि हम लोगों ने 2006 में यह पता लगाया कि भागलपुर में बड़े गरुड़ अपना घोंसला बना रहे हैं और अंडे भी दे रहे हैं, इसके बाद सर्वे में यह देखा गया कि नवगछिया के कदवा में काफी संख्या में घोंसला मौजूद है और फिर वहां के लोगों में जागरूकता फैलाई गई ताकि वह गरुड़ का संरक्षण करें।

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