
बांका/रोहतास | 27 फरवरी, 2026: बिहार में एक ऐसी मर्डर मिस्ट्री का खुलासा हुआ है जिसने रोंगटे खड़े कर दिए हैं। तीन महीने से लापता इंटर की छात्रा शिवानी कुमारी अब इस दुनिया में नहीं रही। उसकी तलाश घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर बांका के घने जंगलों में एक कंकाल के रूप में खत्म हुई। इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि खाकी वर्दी पहनने वाला एक फॉरेस्ट गार्ड है, जिसने अपनी ही प्रेमिका को दफनाने के लिए सरकारी जानकारी का इस्तेमाल किया।
इश्क, इनकार और फिर खूनी इंतकाम
शिवानी और प्रिंस कुमार (वन रक्षक) के बीच पिछले एक साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था।
- वजह: शिवानी प्रिंस पर शादी के लिए दबाव बना रही थी।
- साजिश: प्रिंस शादी नहीं करना चाहता था और इस ‘दबाव’ से हमेशा के लिए छुटकारा पाने के लिए उसने शिवानी को रास्ते से हटाने का मन बना लिया।
मौत का सफर: रोहतास से बांका तक
20 नवंबर, 2025 की वह तारीख, जब शिवानी को लगा कि वह अपने प्रेमी के साथ जा रही है, लेकिन वह असल में अपनी मौत के करीब बढ़ रही थी:
- अपहरण: पार्लर जाने के बहाने निकली शिवानी को प्रिंस ने अपनी कार में बिठाया।
- हत्या: जमुई के पास प्रिंस ने चलती कार में शिवानी को गोली मार दी।
- आखिरी कॉल: मरने से पहले शिवानी ने घर पर फोन कर चीखते हुए बताया था कि प्रिंस उसे जबरदस्ती ले जा रहा है और जान से मारने की धमकी दे रहा है।
फॉरेस्ट गार्ड की ‘प्रोफेशनल’ चालाकी
एक वन रक्षक होने के नाते प्रिंस को जंगलों की भौगोलिक स्थिति और गहरी जगहों की अच्छी जानकारी थी। उसने इसी का फायदा उठाया:
- लोकेशन: वह लाश को जमुई से 92 किलोमीटर दूर बांका के कोडराटारी जंगल ले गया।
- सहयोगी: अपने दो साथियों (उमेश यादव और छोटू कुमार) के साथ मिलकर उसने शिवानी के शव को 10 फुट गहरे गड्ढे में दफना दिया ताकि जंगली जानवर भी उसे बाहर न निकाल सकें और गंध न फैले।
कैसे खुला 10 फुट गहरा राज?
पुलिस ने प्रिंस को 13 जनवरी को ही गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन वह शातिर अपराधी की तरह पुलिस को घुमाता रहा।
- दोस्त की गवाही: प्रिंस के दोस्त आदित्य को जब हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने सारा सच उगल दिया।
- टेक्निकल साक्ष्य: मोबाइल लोकेशन और आदित्य के बयान के आधार पर पुलिस की टीम बुधवार को बांका के जंगल पहुँची।
- कंकाल की बरामदगी: कई घंटों की खुदाई के बाद पुलिस ने 10 फुट नीचे दबे शिवानी के कंकाल को बरामद किया।
VOB का नजरिया: वर्दी पर लगा गहरा दाग
एक सरकारी मुलाजिम, जिसका काम जंगलों और पर्यावरण की रक्षा करना था, उसने उसी जंगल को एक निर्दोष लड़की की कब्र बना दिया। यह मामला न केवल एक जघन्य हत्या है, बल्कि रक्षकों के चयन और उनकी मानसिक जांच पर भी सवाल उठाता है। शिवानी के परिवार के लिए न्याय की लड़ाई अब शुरू हुई है।
ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।


