नंदनगढ़ पहुंचे थाईलैंड के 28 बौद्ध श्रद्धालु, भगवान बुद्ध की आराधना से गूंज उठा स्तूप परिसर

लौरिया में स्थित ऐतिहासिक स्थल पर भाव-विभोर हुए विदेशी भिक्षु, कुशीनगर के लिए किया प्रस्थान

लौरिया (पश्चिम चम्पारण)।बौद्ध धर्म की वैश्विक परंपरा को जोड़ते हुए मंगलवार को थाईलैंड देश से आए 28 बौद्ध श्रद्धालुओं और भिक्षुओं ने लौरिया प्रखंड के नंदनगढ़ बौद्ध स्तूप में भगवान बुद्ध की विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दल में 7 मॉन्क (भिक्षु) और 21 बौद्ध अनुयायी व भिक्षुणियां शामिल थीं।

यह दल बोधगया, राजगीर और वैशाली होते हुए नंदनगढ़ पहुंचा, जहां पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से बुद्ध की आराधना की गई।


“यहां भगवान बुद्ध का पवित्र अवशेष मौजूद है”

द्विभाषीय गाइड रवि चौधरी के माध्यम से मॉन्क फ्रा फुथोन ने बताया कि—

“भगवान बुद्ध के आठ पवित्र अवशेषों में से एक अवशेष नंदनगढ़ में स्थित है। यह वही भूमि है, जहां बुद्ध ने लंबे समय तक प्रवास कर साधना की थी। यह स्थल हमारे लिए अत्यंत पवित्र और दर्शनीय है।”


स्तूप की तीन परिक्रमा, डेढ़ घंटे तक आराधना

श्रद्धालुओं ने सबसे पहले नंदनगढ़ स्तूप की तीन बार परिक्रमा की। इसके बाद स्तूप परिसर में बुद्ध की प्रतिमा स्थापित कर करीब डेढ़ घंटे तक सामूहिक ध्यान और पूजा की गई। वातावरण मंत्रोच्चार और धूप-दीप की खुशबू से भर गया।


भावुक हुए मॉन्क, बोले—यह जीवन का सौभाग्य है

मॉन्क अर्पितोंग़ ने कहा—

“यह हमारे आराध्य भगवान बुद्ध का अद्भुत स्तूप है। यहां आकर हम सभी भावविभोर हो गए। ऐसा लगता है कि आज हमारा जन्म लेना सार्थक हो गया।”


थाई भाषा में बताया बुद्ध का नंदनगढ़ से संबंध

करीब एक घंटे तक मॉन्क अपिचात ने थाई भाषा में अपने अनुयायियों को समझाया कि भगवान बुद्ध का नंदनगढ़ से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने बताया कि कैसे बुद्ध ने यहां रहकर लोगों को शिक्षा दी और दीक्षा प्रदान की।


बच्चों में बांटा प्रसाद, फिर कुशीनगर रवाना

पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने अपने साथ लाए फल स्थानीय बच्चों में प्रसाद के रूप में वितरित किए। इसके बाद दल कुशीनगर के लिए रवाना हो गया।

उनका अगला यात्रा क्रम रहेगा—
कुशीनगर → श्रावस्ती → सारनाथ → वाराणसी → बोधगया


अन्य श्रद्धालु भी रहे शामिल

दल में पाकी नाइ, तालाम पाई, बेजामास, चाईवाद, चान कान, ओन, बान सुन सहित अन्य बौद्ध अनुयायी भी शामिल थे।


नंदनगढ़ एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध श्रद्धा का केंद्र बन गया।

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