
समाचार के मुख्य बिंदु: सरकारी स्कूलों में उत्कृष्ट शिक्षण का मिला फल
- बड़ा सम्मान: शिक्षा विभाग ने ‘टीचर ऑफ द मंथ’ पहल के तहत फरवरी माह के लिए राज्य के 22 सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों का चयन किया।
- भोजपुर अव्वल: चयनित 22 शिक्षकों में अकेले भोजपुर जिले के 9 शिक्षक शामिल; खगड़िया और मुजफ्फरपुर के शिक्षकों का भी रहा दबदबा।
- सम्मान समारोह: शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. बी राजेंद्र ने चयनित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर उनके योगदान को सराहा।
- चयन का आधार: असाधारण शिक्षण कौशल, समर्पण, छात्रों पर सकारात्मक प्रभाव और विभाग के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को बनाया गया मानक।
- डिजिटल प्रक्रिया: ई-शिक्षाकोष पोर्टल के माध्यम से प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों की बारीकी से जांच के बाद हुई घोषणा।
- VOB इनसाइट: शिक्षकों को ब्लॉक स्तर पर पहचान दिलाने वाली यह योजना बिहार की लचर शिक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर सुधारने के लिए एक बड़ा ‘मोटिवेशनल बूस्टर’ साबित हो रही है।
पटना | 25 मार्च, 2026
बिहार में शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाने के लिए शुरू की गई ‘टीचर ऑफ द मंथ’ योजना अब रंग लाने लगी है। शिक्षा विभाग ने फरवरी 2026 के लिए उन 22 चमकते चेहरों की घोषणा कर दी है जिन्होंने अपने शिक्षण कौशल और समर्पण से मिसाल पेश की है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी राजेंद्र ने इन सभी गुरुओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और उनके कार्यों को अन्य शिक्षकों के लिए प्रेरणा बताया।
भोजपुर का शानदार प्रदर्शन: जिलों की भागीदारी का पूरा विवरण
इस महीने की सूची में भोजपुर जिले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सबसे अधिक स्थान प्राप्त किए हैं। चयनित शिक्षकों का जिलावार विवरण निम्नलिखित है:
- भोजपुर: 09 शिक्षक
- खगड़िया: 06 शिक्षक
- मुजफ्फरपुर: 03 शिक्षक
- समस्तीपुर: 01 शिक्षक
- मधेपुरा: 01 शिक्षक
- किशनगंज: 01 शिक्षक
- कैमूर: 01 शिक्षक
कुल 22 चयनित शिक्षकों के प्रशस्ति पत्र संबंधित जिलों के विद्यालयों में भेज दिए गए हैं, ताकि वहां के छात्र और अन्य स्टाफ भी इस गौरवशाली पल के गवाह बन सकें।
कैसे होता है ‘टीचर ऑफ द मंथ’ का चयन? प्रक्रिया को विस्तार से समझें
राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए ‘ई-शिक्षाकोष पोर्टल’ (E-Shikshakosh Portal) का सहारा लिया है। इसकी चयन प्रक्रिया के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
- आवेदन की समय-सीमा: हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच शिक्षकों को स्वयं पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है।
- कठोर मूल्यांकन: विभाग केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि शिक्षक के वास्तविक शिक्षण कौशल, छात्रों के सीखने के स्तर (Learning Outcome) में सुधार और स्कूल के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की समीक्षा करता है।
- सकारात्मक प्रभाव: शिक्षक द्वारा छात्रों के व्यक्तित्व विकास और विद्यालय परिसर के बेहतर प्रबंधन में दिए गए योगदान को अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं।
- अंतिम चयन: राज्य स्तरीय समिति आवेदनों की बारीकी से स्क्रूटनी करने के बाद अंतिम नामों पर मुहर लगाती है।
VOB का नजरिया: क्या ‘सम्मान’ से सुधरेगी शिक्षा?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि शिक्षा विभाग की यह पहल प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
- हेल्दी कॉम्पिटिशन: जब किसी शिक्षक को राज्य स्तर पर पहचान मिलती है, तो वह ब्लॉक और जिले के अन्य शिक्षकों के बीच एक ‘हेल्दी कॉम्पिटिशन’ (स्वस्थ प्रतिस्पर्धा) पैदा करता है।
- जवाबदेही का अहसास: ई-शिक्षाकोष पोर्टल के जरिए आवेदन करने से शिक्षकों में तकनीकी साक्षरता बढ़ रही है और वे अपने कार्यों का रिकॉर्ड रखने के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
- शिक्षकों की गरिमा: ऐसे सम्मानों से उन शिक्षकों को समाज में खोई हुई गरिमा वापस पाने में मदद मिलती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतरीन काम कर रहे हैं।
निष्कर्ष: सुशासन और शैक्षणिक क्रांति का समन्वय
अपर मुख्य सचिव डॉ. बी राजेंद्र द्वारा हस्ताक्षरित ये प्रशस्ति पत्र केवल कागज के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि ये बिहार की नई ‘शैक्षणिक क्रांति’ के प्रतीक हैं। उम्मीद है कि आगामी महीनों में अन्य जिलों, विशेषकर पिछड़े क्षेत्रों के शिक्षक भी इस सूची में अपनी जगह बनाएंगे। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ शिक्षकों के सम्मान और शिक्षा व्यवस्था में आने वाले हर क्रांतिकारी बदलाव की खबर आप तक निरंतर पहुँचाता रहेगा।


