17 जमीनों के कागजात, आलीशान मकान और नेपाल में बंगला… बिहार के इंजीनियर के ठिकानों पर रेड में करोड़ों की संपत्ति का खुलासा

पटना/मधुबनी: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी कार्रवाई के बीच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। मधुबनी में पदस्थापित बिजली विभाग के इंजीनियर मनोज कुमार रजक के ठिकानों पर हुई छापेमारी में करोड़ों रुपये की संदिग्ध संपत्ति का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इंजीनियर ने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है।

एक साथ 7 ठिकानों पर छापेमारी
EOU की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से दरभंगा, मधुबनी और सुपौल जिले में इंजीनियर के कुल 7 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। कई घंटों तक चली इस कार्रवाई में टीम ने घर, कार्यालय और अन्य संपत्तियों की गहन तलाशी ली। प्रारंभिक जांच में ही आय से लगभग 62 प्रतिशत अधिक संपत्ति होने के संकेत मिले हैं।

17 जमीनों के कागजात, कई राज्यों में फैली संपत्ति
छापेमारी के दौरान अधिकारियों को 17 अलग-अलग जमीन और प्लॉट के दस्तावेज मिले, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। ये संपत्तियां बिहार के अररिया, सुपौल और दरभंगा के अलावा पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक फैली हुई हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि निवेश को कई जगहों पर फैलाकर संपत्ति जुटाई गई।

नेपाल में भी बनाया जा रहा था बंगला
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। इंजीनियर ने नेपाल के सुनसरी इलाके में जमीन खरीदकर एक आलीशान बंगला बनवाना शुरू किया था। सीमा पार संपत्ति में निवेश को लेकर अब एजेंसियां और भी सतर्क हो गई हैं और इसके स्रोत की जांच की जा रही है।

होटल, गोदाम और पेट्रोल पंप का कनेक्शन
EOU को सुपौल के करजाईन में तीन होटलों, निर्मली में एक गोदाम और दरभंगा में पेट्रोल पंप के लिए लीज पर ली गई जमीन के दस्तावेज भी मिले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि आरोपी ने विभिन्न व्यवसायों में भी निवेश कर रखा था, जिनकी वैधता की जांच जारी है।

भाई की भूमिका भी संदेह के घेरे में
इस मामले में इंजीनियर के भाई संजय रजक को भी सह-अभियुक्त बनाया गया है। जांच में पता चला है कि उनके नाम पर एक गैस एजेंसी संचालित है। आरोप है कि इसी एजेंसी के नाम पर खरीदी गई स्कॉर्पियो गाड़ी को सरकारी कार्य में दिखाकर विभाग से अवैध भुगतान लिया गया।

नकद और बैंक खातों की भी जांच
छापेमारी के दौरान 1.05 लाख रुपये नकद बरामद किए गए, जबकि विभिन्न बैंक खातों में करीब 4.25 लाख रुपये जमा होने की जानकारी मिली है। हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि यह केवल शुरुआती आंकड़ा है और आगे जांच में और भी बड़ी संपत्ति का खुलासा हो सकता है।

FIR दर्ज, जांच जारी
EOU ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जब्त दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, वैसे-वैसे कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया जाएगा।

भ्रष्टाचार पर सख्ती के संकेत
इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति के तौर पर देखा जा रहा है। लगातार हो रही ऐसी छापेमारी से यह स्पष्ट है कि अवैध संपत्ति अर्जित करने वालों पर शिकंजा कसता जा रहा है।

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