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करोड़ों की लागत से मायागंज अस्पताल में बना 100 बेड का जच्चा-बच्चा अस्पताल, इलाज नहीं हो सका शुरू

मायागंज अस्पताल में करोड़ों की लागत से 100 बेड का जच्चा-बच्चा अस्पताल और डिस्ट्रिक अर्ली इन्वेंशन सेंटर (डीईआईसी) तैयार हुआ। दोनों अस्पतालों में सिर्फ डॉक्टर-पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती ही बाकी थी। इसके बाद एक ही छत के नीचे जन्म लेने वाले नवजात बच्चों का न केवल मानसिक रोग, बहरापन, दिव्यांगता आदि का इलाज होने लगता, बल्कि एक ही अस्पताल में मां का प्रसव होता तो बच्चे का इलाज भी किया जाता। इन दोनों अस्पतालों पर कोरोना का ग्रहण लग गया।

पहले तो तैयार होने में लग गये डेढ़ साल, अब दो साल से शुरू होने को तरस रहा डीइआईसी

पहले तो मायागंज अस्पताल के पीजी शिशु रोग विभाग के पास में एक करोड़ 23 लाख 69 हजार 200 रुपये की लागत से इस भवन को तैयार होने में करीब डेढ़ साल लग गये। बनाने वाली कंपनी ने इस बिल्डिंग को दिसंबर 2018 में ही हैंडओवर कर दिया। यहां तक कि फिजियोथैरेपिस्ट से लेकर टेक्नीशियन तक की तैनाती हो चुकी थी।

संभावना जतायी गयी थी कि मार्च 2019 तक यह सेंटर काम करने लगेगा। सिर्फ यहां के ओपीडी में कान, नाक व गला रोग, नेत्र रोग विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक, फिजियोथैरेपिस्ट, ऑक्यूपेशनल फिजियोथैरेपिस्ट, स्पीच थैरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट, बच्चों की देखभाल के लिए 30 नर्सों की तैनाती होनी बाकी थी।

अगर यह सेंटर तैयार हो जाता तो एक ही छत के नीचे करीब पांच हजार वर्गफीट में बने इस सेंटर के ओपीडी में बहरापन, गूंगापन, मानसिक-शारीरिक अपंगता व विक्षिप्तता के शिकार बच्चों का इलाज होने लगता। आज के हालात ये हैं कि हर रोज मायागंज अस्पताल में नाक, कान व गला, मनोरोग के शिकार करीब 15 से 20 की संख्या में बच्चे आते हैं, जिनका अलग-अलग ओपीडी में जांच और इलाज होता है। इसी साल 16 जनवरी से डीईआईसी में लोगों को कोरोना का टीका लगाया जा रहा है।