HIGHLIGHTS: नगर निगम की ‘प्रोसीडिंग’ में बड़ा खेल; नियम ताक पर रख शामिल कीं योजनाएं
- बिना चर्चा ‘पास’: बजट सत्र के दौरान जिन 6 योजनाओं पर चर्चा तक नहीं हुई, उन्हें चुपचाप प्रोसीडिंग (कार्यवाही) में शामिल कर लिया गया।
- पार्षदों का ‘अल्टीमेटम’: संजय सिन्हा, अभिषेक आनंद और नंदिकेश शांडिल्य ने नगर आयुक्त को घेरा; कहा— “यह मनमानी नहीं रुकी तो जाएंगे हाई कोर्ट।”
- योजनाओं पर ‘होल्ड’: पार्षदों के गुस्से को देखते हुए नगर आयुक्त ने तत्काल प्रभाव से सभी विवादित योजनाओं पर रोक लगाई।
- मेयर की सफाई: डॉ. बसुंधरा लाल बोलीं— “चर्चा नहीं हुई पर मैपिंग की गई थी, पार्षदों से बात की जाएगी।”
भागलपुर | 20 मार्च, 2026
भागलपुर नगर निगम में इन दिनों विकास की सड़कों पर ‘विवाद’ की कालिख पुत गई है। करीब 19 करोड़ रुपये की छह बड़ी योजनाओं को लेकर पार्षदों और नगर प्रशासन के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है। आरोप है कि 10 मार्च की बजट बैठक में जिन प्रस्तावों का नाम तक नहीं लिया गया, उन्हें ‘अवैध’ तरीके से सरकारी रिकॉर्ड का हिस्सा बना दिया गया।
अंधेरे में ‘पास’ हुईं ये 6 योजनाएं: यहाँ खर्च होने थे ₹19 करोड़
नगर निगम के इतिहास में पहली बार बिना सदन की सहमति के इन क्षेत्रों की फाइलों को ‘मैप’ कर लिया गया था:
- वार्ड 50 व 10: सूर्यलोक कॉलोनी और साहेबगंज में सड़क-नाला निर्माण (₹3.20 करोड़)।
- वार्ड 33, 35 व 34: भीखनपुर और बरहपुरा क्षेत्र में निर्माण कार्य (₹3.39 करोड़)।
- वार्ड 42 व 29: शैलबाग और हाउसिंग बोर्ड सेक्टर में नाला व सड़क (₹3.13 करोड़)।
- वार्ड 15 व 46: तातारपुर, रेलवे स्टेशन और मोजाहिदपुर क्षेत्र में निर्माण (₹3.30 करोड़)।
- वार्ड 11, 10, 42 व 39: विभिन्न क्षेत्रों में पीसीसी सड़क व नाला (₹3.09 करोड़)।
- वार्ड 1 व 2: बर्निंग घाट रोड और आयुर्वेदिक कॉलेज के सामने निर्माण (₹3.13 करोड़)।
“रामनवमी के बाद सड़कों पर उतरेंगे” — पार्षदों की चेतावनी
गुरुवार को नगर आयुक्त से मिलने पहुंचे पार्षदों ने साफ लहजे में कहा कि यह सीधे तौर पर बोर्ड की नियमावली का उल्लंघन है। प्रस्ताव संख्या 1 से 6 को जिस तरह ‘बैक डोर’ से प्रोसीडिंग में जोड़ा गया, वह गड़बड़ी की ओर इशारा करता है। नगर आयुक्त ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए योजना शाखा के प्रभारी को सख्त निर्देश दिए और सभी विवादित योजनाओं को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
VOB का नजरिया: क्या ‘विकास’ की आड़ में हो रहा है चहेतों का ‘मैपिंग’ खेल?
नगर निगम में विकास योजनाओं के चयन की एक तय प्रक्रिया है, जिसे ‘सदन’ कहा जाता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि बिना चर्चा के 19 करोड़ की योजनाओं को प्रोसीडिंग में शामिल करना प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक बड़ा सवालिया निशान है। अगर मेयर साहिबा कह रही हैं कि ‘मैपिंग’ हो गई थी, तो सवाल यह है कि सदन के सामने उस मैपिंग को क्यों नहीं रखा गया?
पार्षदों का विरोध केवल बजट को लेकर नहीं, बल्कि ‘क्षेत्रीय भेदभाव’ को लेकर भी है। अगर कुछ खास वार्डों को ही बिना चर्चा के करोड़ों के फंड दिए जाएंगे, तो बाकी पार्षदों का नाराज होना लाजिमी है। नगर आयुक्त द्वारा ‘होल्ड’ लगाना एक सही प्रशासनिक कदम है, लेकिन अब यह देखना होगा कि क्या रामनवमी के बाद यह विवाद ‘सुलह’ की सड़क पर चलेगा या फिर ‘हाई कोर्ट’ की चौखट तक पहुंचेगा। भागलपुर की जनता को सड़कों की जरूरत है, फाइलों के खेल की नहीं।


