सीट बंटवारे पर नाराज उपेंद्र कुशवाहा की अमित शाह से मुलाकात, 45 मिनट चली बैठक

पटना | 14 अक्टूबर 2025 बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए गठबंधन में सीट बंटवारे के बाद एक बार फिर से हलचल तेज हो गई है। कुछ सीटों को लेकर सहयोगी दलों के बीच मतभेद सामने आने लगे हैं। इसी क्रम में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमा) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी खुलकर सामने आई है।

रालोमा के खाते की मानी जा रही महुआ सीट लोजपा (रामविलास) और दिनारा सीट जेडीयू के हिस्से में चली जाने से उपेंद्र कुशवाहा असंतुष्ट हो गए। नाराजगी इस हद तक बढ़ी कि उन्होंने एनडीए उम्मीदवारों के नामांकन कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया।

सूत्रों के अनुसार, सीट बंटवारे के दौरान से ही कुशवाहा असंतुष्ट थे। पहले उन्हें अपेक्षा से कम सीटें मिली थीं, जिस पर उन्होंने अपनी नाखुशी जताई थी। बाद में स्थिति सामान्य होती दिखी, लेकिन जब उनके हिस्से की दो प्रमुख सीटें दूसरे दलों को दी गईं तो उन्होंने खुलकर विरोध जताया।
कुशवाहा महुआ सीट से अपने पुत्र दीपक कुशवाहा और दिनारा सीट से आलोक सिंह को मैदान में उतारने की योजना बना चुके थे।

जैसे ही नाराजगी की खबर एनडीए नेतृत्व तक पहुंची, मान-मनौव्वल की कोशिशें शुरू हो गईं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को उपेंद्र कुशवाहा से बातचीत की जिम्मेदारी दी गई। बुधवार को दोनों दिल्ली रवाना हुए, जहां कुशवाहा ने मीडिया से कहा — “नथिंग इज वेल इन एनडीए” (यानि सबकुछ ठीक नहीं है)।

दिल्ली पहुंचने के बाद उपेंद्र कुशवाहा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से करीब 45 मिनट की मुलाकात की। बैठक के बाद उनके सुर नरम पड़े और उन्होंने कहा, “एनडीए में सबकुछ ठीक है। जिन मुद्दों पर मतभेद थे, उन पर नेताओं से बातचीत हो चुकी है।” हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि महुआ और दिनारा सीट पर सहमति बनी या नहीं, तो वे जवाब देने से बचते दिखे और कहा कि “इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ नाराजगी दूर करने भर की नहीं थी, बल्कि एनडीए के छोटे सहयोगी दलों को एकजुट रखने की रणनीति भी थी। चुनाव से पहले एनडीए किसी भी तरह का आंतरिक विवाद सार्वजनिक रूप से नहीं चाहता।

गौरतलब है कि उपेंद्र कुशवाहा बिहार की राजनीति में कुशवाहा समाज के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। एनडीए के लिए उनका साथ चुनावी समीकरणों में अहम भूमिका निभाता है। यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व ने तुरंत स्थिति को संभालने की कोशिश की।

अब सबकी नजर रालोमा की आगामी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर है, जहां यह स्पष्ट होगा कि सीट बंटवारे का विवाद पूरी तरह खत्म हुआ या समझौते के बावजूद मनमुटाव अभी भी बाकी है।


 

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