बिहार में विशेष सर्वेक्षण कार्य को लेकर सरकार सख्त, अधिकारियों को समय सीमा में काम पूरा करने का निर्देश

पटना। बिहार में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम को लेकर सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट संकेत दिया है कि यह अभियान उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्यभर में चल रहे सर्वे कार्यों में तेजी लाने और उन्हें तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में गुरुवार को पटना स्थित राजस्व (सर्वे) प्रशिक्षण संस्थान, शास्त्रीनगर में नव पदस्थापित बंदोबस्त पदाधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण एवं क्षमतावर्द्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव Jai Singh ने किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि आम लोगों के जमीन संबंधी अधिकारों को सुरक्षित और अद्यतन करने का बड़ा अभियान है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सर्वे कार्यों को गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ समय पर पूरा करना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

सचिव जय सिंह ने कहा कि भूमि विवाद बिहार की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक रहे हैं। ऐसे में विशेष सर्वेक्षण अभियान का उद्देश्य जमीन के अभिलेखों को सही और अद्यतन बनाना है ताकि आम लोगों को भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सर्वेक्षण कार्य के दौरान तकनीकी दक्षता के साथ-साथ लोगों के प्रति संवेदनशीलता भी बनाए रखें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त अधिनियम 2011 और समय-समय पर उसमें किए गए संशोधनों की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि कानून के विभिन्न प्रावधानों का पालन करते हुए किस प्रकार पारदर्शी और प्रभावी तरीके से सर्वेक्षण कार्य पूरा किया जा सकता है।

कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों और सर्वेक्षण कर्मियों को सर्वे कार्यों से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया। इसमें प्रपत्र-1 से लेकर प्रपत्र-25 तक की प्रक्रिया, ग्राम अभिलेखों के संधारण, रिकॉर्ड तैयार करने और भूमि संबंधी डेटा के प्रबंधन की जानकारी दी गई।

इसके अलावा आधुनिक तकनीकी प्रणालियों के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को भू-सर्वेक्षण सॉफ्टवेयर, आर-टू-आर सॉफ्टवेयर, शिविर स्कैन रिपोर्ट प्रणाली और भू-नक्शा सॉफ्टवेयर के संचालन की व्यावहारिक जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान यह बताया गया कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से सर्वे कार्यों को अधिक सटीक, पारदर्शी और तेज बनाया जा सकता है।

विभागीय अधिकारियों ने बताया कि राज्य सरकार अब भूमि अभिलेखों को डिजिटल स्वरूप में तैयार करने पर तेजी से काम कर रही है। इससे आम लोगों को जमीन से जुड़े दस्तावेज प्राप्त करने में आसानी होगी और विवादों को कम करने में भी मदद मिलेगी।

कार्यक्रम के दौरान एमआईएस और सीवीएमएस प्रणाली के माध्यम से सर्वे कार्यों की निगरानी और रिपोर्टिंग प्रक्रिया की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि किस प्रकार तकनीकी प्लेटफॉर्म के जरिए सर्वेक्षण कार्यों की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सकती है और समय-समय पर रिपोर्ट तैयार की जा सकती है।

प्रशिक्षण सत्र में विभागीय अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने विशेष सर्वेक्षण कार्यों के दौरान आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान पर भी चर्चा की। अधिकारियों को बताया गया कि जमीन विवाद, अभिलेखों की त्रुटियां और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी जैसी समस्याओं से किस तरह प्रभावी तरीके से निपटा जा सकता है।

राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बिहार विशेष सर्वेक्षण एवं बंदोबस्त कार्यक्रम राज्य में भूमि सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल जमीन से जुड़े रिकॉर्ड अपडेट होंगे, बल्कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और भूमि प्रबंधन में भी सुधार आएगा।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में औरंगाबाद, बेगूसराय, वैशाली, जहानाबाद, पूर्णिया, सुपौल, जमुई, सारण, रोहतास और नालंदा जिलों के नव पदस्थापित बंदोबस्त पदाधिकारी शामिल हुए। सभी अधिकारियों को क्षेत्रीय स्तर पर सर्वे कार्यों को गति देने और लोगों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिए गए।

कार्यक्रम के दौरान भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक Suharsh Bhagat और विशेष कार्य पदाधिकारी Nawazish Akhtar समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों को सर्वेक्षण कार्यों में आधुनिक तकनीक और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के महत्व के बारे में जानकारी दी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में भूमि विवादों और रिकॉर्ड संबंधी समस्याओं को दूर करने के लिए यह अभियान बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कई मामलों में पुराने और त्रुटिपूर्ण अभिलेखों के कारण लोगों को वर्षों तक कानूनी और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यक्रम से जमीन रिकॉर्ड को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

प्रशासन का मानना है कि यदि सर्वे कार्य समय पर और सही तरीके से पूरा होता है तो इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में भूमि प्रबंधन व्यवस्था मजबूत होगी। साथ ही लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा भी बढ़ेगा।

फिलहाल राज्य सरकार इस अभियान को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रशिक्षण कार्यक्रम और तकनीकी सुधारों पर जोर दे रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने जिलों में विशेष सर्वेक्षण कार्यों को कितनी तेजी और प्रभावशीलता के साथ आगे बढ़ाते हैं।

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