शिक्षा के लिए उमड़ती ललक: “डॉ. भीमराव अंबेडकर समग्र सेवा अभियान” में दलित टोलों से लाखों आवेदन

पटना, 29 जून।बिहार के दलित व वंचित समुदायों में शिक्षा और कल्याण योजनाओं के प्रति जागरूकता में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिल रही है। राज्य सरकार द्वारा संचालित “डॉ. भीमराव अंबेडकर समग्र सेवा अभियान” के तहत आयोजित विशेष शिविरों से यह स्पष्ट हो गया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों के लोग अब शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आगे आ रहे हैं।

स्कूलों में दाखिले के लिए 95.40% आवेदनों का निष्पादन

14 अप्रैल से 25 जून तक चले शिविरों में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे अधिक भागीदारी देखने को मिली। दलित बस्तियों से कुल 1,62,174 आवेदन सिर्फ बच्चों के स्कूलों में दाखिले को लेकर प्राप्त हुए, जिनमें से 1,54,715 आवेदनों का निष्पादन शिक्षा विभाग द्वारा कर दिया गया है। यह निष्पादन दर 95.40% है, जो स्पष्ट करता है कि समुदाय के भीतर शिक्षा के प्रति जागरूकता व मांग तेजी से बढ़ी है।

राज्य सरकार के लिए यह एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि लंबे समय से यह धारणा बनी हुई थी कि दलित व आदिवासी समुदाय शिक्षा में पिछड़े हुए हैं। लेकिन इस अभियान ने उन पूर्वधारणाओं को तोड़ते हुए यह दिखाया है कि यदि सही अवसर और मंच मिले तो ये समुदाय भी मुख्यधारा में तेजी से जुड़ने को तैयार हैं।

कुल 38.45 लाख आवेदन, 47.91% का निष्पादन

राज्य के 60,000 से अधिक दलित टोलों में आयोजित शिविरों में अब तक 38,45,979 व्यक्तिगत लाभ से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से 18,42,545 आवेदनों का निष्पादन हो चुका है, जो कुल आवेदनों का 47.91% है। विभागीय स्तर पर निष्पादन की यह रफ्तार संतोषजनक मानी जा रही है।

अन्य योजनाओं में भी तेज निष्पादन

स्कूलों के अलावा, आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़ी योजनाओं में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। समाज कल्याण विभाग को 1,17,404 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1,07,570 का निष्पादन किया गया है। निष्पादन दर 91.62% रही है।

इसी तरह, अन्य योजनाओं जैसे:

  • आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड
  • मनरेगा जॉब कार्ड
  • जीविका समूहों से जुड़ाव
  • प्रधानमंत्री जनधन योजना
  • प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना

इन सभी में आवेदनों के निष्पादन की रफ्तार उल्लेखनीय रही है।

सीधे समुदाय तक पहुंच का असर

यह पहली बार है जब सरकार ने सीधे दलित बस्तियों में शिविर आयोजित कर, घर-घर जाकर आवेदन लिए हैं। इससे उन परिवारों तक योजनाओं की जानकारी व पहुंच सुनिश्चित हो सकी, जो सामान्य प्रक्रिया में पिछड़ जाते थे।

इस अभियान की एक और खास बात यह रही कि “वन स्टॉप सर्विस मॉडल” के तहत विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि एक ही स्थान पर मौजूद रहे, जिससे दस्तावेज जांच, सत्यापन और त्वरित निष्पादन संभव हो सका।

नीतिगत दृष्टिकोण से बड़ा बदलाव

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू किए गए इस अभियान के पीछे स्पष्ट रणनीति रही है – अनुसूचित जाति व जनजाति समुदायों को समाज की मुख्यधारा में आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक रूप से लाना। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर इस अभियान की शुरुआत प्रतीकात्मक ही नहीं, व्यावहारिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण रही।


“डॉ. अंबेडकर समग्र सेवा अभियान” बिहार में सामाजिक न्याय को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में एक प्रभावी प्रयास बनकर उभरा है। इससे यह प्रमाणित होता है कि दलित व आदिवासी समुदायों में आगे बढ़ने की ललक है, बस जरूरत है अवसर और मार्गदर्शन की। सरकार यदि इसी संकल्प के साथ योजनाओं का निष्पादन करती रही, तो बिहार की सामाजिक संरचना में सकारात्मक बदलाव तय है।


 

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