बिहार कृषि विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के मौके पर होगा अंतरराष्ट्रीय वेबनॉर का आयोजन

 

बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर का 11 वाँ स्थापना  दिवस 5 अगस्त को मनाया जा रहा है । 05 अगस्त 2010 को मातृ संस्था राजेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय , पूसा , समस्तीपुर से अलग होकर वर्तमान बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर की स्थापना हुई थी । इस अवसर पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा “ फसल सुरक्षा के माध्यम से खाद्य सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करना ” विषय पर दो दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय वेबनॉर का आयोजन किया जा रहा है ।

इस अन्तर्राष्ट्रीय वेबनॉर में डा ० जेड ० आर ० खान , प्रधान वैज्ञानिक , इन्टरनेशनल सेंटर ऑफ कीट फिजियोलॉजी एंड इकोलॉजी , केन्या , डा ० नेन्सी पी ० कस्टिला , मुख्य वैज्ञानिक , अन्तर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान , मनीला , डा ० चन्द्रन सोभासुन्दर , प्रधान वैज्ञानिक , मलाया विश्वविद्यालय , कुआलालमपुर , डा ० फ्रांसिसकों सौतुआ , वैज्ञानिक , व्युनर्स आयर्स विश्वविद्यालय , अर्जेन्टीना , डा ० अब्दुल रेहमान , प्रधान वैज्ञानिक , कृषि विश्वविद्यालय , फैसलाबाद , पाकिस्तान आदि अपने अनुभव तथा नवीन अनुसंधान के निष्कर्षों से प्रतिभागियों को अवगत करायेंगे ।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर ने 10 वर्षों की अल्प अवधि में ही कृषि शिक्षा , शोध , प्रसार के क्षेत्र में अपना अभूतपूर्व योगदान दिया है । कृषि शिक्षा के क्षेत्र में बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर ने संशोधित पाठ्यक्रम , स्टूडेन्ट रेडी प्रोगाम , एक्सपीरेंशियल लर्निंग , रावे प्रोग्राम सहित 5 वीं डीन्स समिति की अनुशंसाओं को पूर्ण रूप से लागू किया है । विगत वर्ष में विश्वविद्यालय के द्वारा विकसित धान , चना , मसूर तथा बैंगन फसल की कुल 05 प्रभेदों को स्टेट भेराईटल रीलिज कमिटी के द्वारा अनुशंसित किया गया है ।

साथ ही विश्वविद्यालय के द्वारा विकसित धान एवं चना की दो प्रभेद को सेन्ट्रल भेराईटल रीलिज कमिटी के द्वारा अधिसूचित किया गया है । विश्वविद्यालय ने टिशू कल्चर के माध्यम से अनानास तथा बाँस के रोगमुक्त पौधा उत्पादन का प्रोटोकॉल भी विकसित किया है ।

बायोफोर्टिफाइड खाद्यान्न फसल प्रभेदों , अधिक उत्पादन के लिए कतरनी धान की पौध संरचना में सुधार , धान की राजेन्द्र श्वेता प्रभेद में सूखा एवं जलजमाव सहन करने वाले जीन का प्रतिरोपण , कीड़ा – बीमारी की निगरानी हेतु आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का व्यवहार , कीटनाशी के अवशेष जाँच हेतु स्टेट – ऑफ – आर्ट प्रयोगशाला , हाइड्रोपोनिक्स का व्यवसायीकरण एवं स्मार्ट क्रॉप मैनेजमेंट आदि पर विश्वविद्यालय ने अनुसंधान एवं विकास का कार्य किया है । विश्वविद्यालय के सहयोग से बिहार का एक और विशिष्ट उत्पाद ” मखाना ” भी आने वाले समय में भौगोलिक सूचक प्राप्त करने में सफल होगा ।

विगत वर्ष में विश्वविद्यालय सहित उसके अंगीभूत संस्थानों ने 5028 क्विंटल धान बीज , 2942 क्विंटल गेहूँ बीज , 1647 क्विंटल मसूर बीज , 966 क्विंटल चना बीज , 65 क्विंटल मखाना बीज तथा 29 क्विंटल विभिन्न सब्जी बीज ( कुल 10,677 क्विंटल ) बीज उत्पादित करके किसानों को उपलब्ध कराया है ।

पर्यावरण सुरक्षा एवं हरित क्षेत्र में बढ़ोत्तरी के साथ फल – फूल – सब्जी उत्पादन के माध्यम से पोषण सुरक्षा के लिए विश्वविद्यालय ने 20.0 लाख से अधिक पौधों / रोगमुक्त टिशू कल्चर पौध सामग्री का उत्पादन करके किसानों को उपलब्ध कराया है जिसमें 8.0 लाख आम के पौधे , 1.5 लाख सहजन के पौधे , 17,000 रोगमुक्त केला , बाँस एवं अनानास का टिशू कल्चर पौधा शामिल है । विगत वर्ष में कृषि प्रसार एवं तकनीकी हस्तानान्तरण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने महती सफलता हासिल की है ।

विश्वविद्यालय के प्रसार शिक्षा सहित अन्य आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की समसामयिक जानकारी , सलाह और क्षमता विकास हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसान , ग्रामीण युवा तथा प्रसार कार्यकर्ता लाभान्वित हुए है । विश्वविद्यालय कृषि स्टार्टअप को बढ़ावा देने हेतु सब – एग्री इन्क्यूवेटर की स्थापना की गई जिसमें 50 से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है और उद्यमी बनाने का कार्य किया जा रहा है ।

बिहार कृषि विश्वविद्यालय , सबौर के अधीन सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों में गरीब कल्याण रोजगार अभियान योजना के तहत दूसरे राज्यों से प्रवासी मजूदरों को रोजगार एवं उद्यमिता के प्रति प्रेरित करने का कार्य किया जा रहा है । साथ ही विश्वविद्यालय 10विषयों में प्रशिक्षण हेतु आवेदन मांगे गये थे जिसमें अभी तक 2350 लोगों के आवेदन प्राप्त हुए है ।

प्रसार शिक्षा निदेशालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों के द्वारा सूचना तकनीक के विभिन्न माध्यमों यथा यू – ट्यूब , वाट्सएप , सामुदायिक रेडियो स्टेशन के द्वारा किसानों , पशुपालकों सहित आम जनता को कोविड -19 वैश्विक महामारी बीमारी से बचाव , सहित अन्य बातों की जानकारी प्रदान की गयी । कृषि क्षेत्र में विश्वविद्यालय के योगदान को देश – दुनिया में मान्यता मिल रही है और इसे अनेक पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हो रहा है ।

अभी हाल में सूचना तकनीक के माध्यम से कृषि विकास हेतु ई – गर्वनेश अवार्ड एवं सूचना तकनीक के माध्यम से किसानों के कौशल उन्नयन को बढ़ावा देने के लिए देश के प्रतिष्ठित स्कॉच संस्थान ने बिहार कृषि विश्वविद्यालय को ” गोल्ड मेडल ” प्रदान किया है । खेत – खेती – खेतिहर के सर्वांगीण विकास एवं पोषण सहित स्वास्थ्य सुरक्षा के संवर्द्धन हेतु अनेक नवाचार किया गया है जिसमें शिशु पोषण हेतु अंकुरण मॉडल , नवजात शिशु एवं जननी पोषण सुरक्षा हेतु अपनी क्यारी – अपनी थाली , पशु स्वास्थ्य सुरक्षा हेतु सामुदायिक पशु स्वास्थ्य मॉडल केन्द्र , पौधा – मृदा स्वास्थ्य जाँच हेतु ई – क्रॉप डॉक्टर मॉडल आदि प्रमुख है ।

इन नवाचारी तकनीकों से समाज के हर वर्ग को बड़े पैमाने पर लाभ मिला है , साथ ही प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी हुआ है । राज्य सरकार द्वारा संपोषित तथा समेकित बाल विकास कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित अपनी क्यारी – अपनी थाली योजना के माध्यम से 23,000 आँगनबाड़ी केन्द्रों से जुड़े बच्चों एवं महिलाओं को पोषण सुरक्षा प्रदान करने की पहल हमारे विश्वविद्यालय का एक नवाचारी प्रयास है । विगत वर्ष में विश्वविद्यालय ने अनेकों संस्थागत सुधार किये हैं ।

आने वाले समय में विश्वविद्यालय अनुसंधान डाटाबेस प्रबन्धन व्यवस्था को समृद्ध करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के प्रोजेक्ट इन्फारमेशन एण्ड मैनेजमेंट सिस्टम को लागू करेगा जिसके फलस्वरूप लोकहित में विश्वविद्यालय योजना / परियोजना का ऑनलाईन मूल्यांकन और कुशलता से योजना के आँकड़ों का प्रबन्धन किया जा सकेगा । विश्वविद्यालय में आन्तरिक गुणवत्ता निर्धारण कोषांग ( आई.क्यू.ए.सी. ) की स्थापना की जा चुकी है , जिसके माध्यम से गुणवत्ता के लक्ष्य एवं उसके स्थायित्व को बढ़ाया जा सकेगा ।

इसके साथ ही विश्वविद्यालय में संस्थागत तकनीकी प्रबंधन इकाई ( आई.क्यू.ए.सी. ) की स्थापना करके प्रौद्योगिकी के विकास , हस्तानान्तरण और व्यवसायीकरण को प्रबन्धित किया जा रहा है । विश्वविद्यालय ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के द्वारा प्रकाशित की जा रही कृषि विश्वविद्यालय / सकमक्ष संस्थानों की श्रेष्ठता सूची में बड़ी छलांग लगायी और 10 वर्षों में अल्पावधि में पूरे देश में 18 वां स्थान हासिल किया है ।

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