पानी में घुसे लोगों को देख इंजीनियर पर भड़के सांसद, पूछा-आपकी बेटी पानी में घुसकर पढ़ने जाएगी तब कैसा लगेगा?

बिहार में ग्रामीण विकास विभाग के काम को देख सांसद भी हैरान रह गये। नया पुल बनाए बिना ही पुराने पुल को तोड़ डाला गया। जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खेत में भरे पानी में घुटनेभर पानी में घुसकर लोग गुजर रहे हैं। लोगों की इस स्थिति को देख सांसद वाल्मीकिनगर सांसद सनील कुमार इंजीनियर पर भड़क गये।

सांसद सुनील कुमार ने ग्रामीण विकास विभाग के इंजीनियर को फोन लगाया और उनकी जमकर क्लास लगा दी। सांसद ने फोन पर इंजीनियर से पूछा कि आपकी बच्ची पानी में घुसकर पढ़ने जाएगी तब कैसा लगेगा। यहां बच्ची सब घुटनेभर पानी में घुसकर स्कूल पढ़ने जा रही है। यह कितने दिन का मामला है? काम क्यों नहीं हुआ? डायवर्सन सही रहना चाहिए ना जी..डायवर्सन भी खत्म हो गया है..लोग कैसे आएगा और जाएगा..

अरे भाई हम यहां पर आए हुए हैं देखा कि पूरा आवागमन डिस्टर्ब कर दिया गया है। हम कह रहे है कि आप लोग ठेकेदार के फेर में रहते हैं खाली..लोगों को भारी परेशानी हो रही है। इसे लेकर हम विभाग को लिखेंगे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी अवगत कराएंगे। सांसद ने फिर इंजीनियर से पूछा कि आपकी बच्ची पानी में घुसकर स्कूल पढ़ने जाएगी तब आपको कैसा लगेगा?

दरअसल वाल्मीकिनगर सांसद सनील कुमार बगहा के पिपरा-पिपरासी तटबंध का निरीक्षण करने गये थे। तब वहां का दृश्य देखकर वो हैरान रह गये। उन्होंने देखा कि लोग घुटनेभर पानी में चलकर एक गांव से दूसरे गांव जा रहे हैं। तभी ग्रामीणों की नजर उन पर गई तो सांसद को अपनी समस्या बताने लगे। बताया कि बांसी नदी पर बने पुराने पुल को तोड़ दिया गया है जबकि बिना नये पुल के निर्माण के ऐसा किया गया है।

लोगों ने कहा था कि जब तक नया पुल नहीं बन जाता तब तक पुराने पुल को नहीं तोड़ा जाए तब विभाग के अधिकारी उनकी बात नहीं माने और पुराने पुल को तोड़ डाला और नया पुल भी नहीं बनाया। जिसके कारण यहां के लोगों को पानी में घुसकर एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ रहा है। वही बच्चियों को स्कूल जाने के लिए इसी पानी में घुसकर जाना पड़ता है खुद इन लोगों की हालत सांसद ने भी आज देख लिया। लोगों की इस परेशान को देख वो भी हैरान रह गये। उन्होंने तुरंत विभाग के इंजीनियर को फोन लगाई और उनकी जमकर फटकार लगा दी.
बता दें कि बिहार-यूपी सीमा पर बसे मंझरिया-रामनगर और अर्जुनही के बीच बांसी नदी पर दशकों पुराना एक पुल था जो इलाके के लोगों के आवागमन का एक मात्र साधन था। जिसे बिना कोई वैकल्पिक व्यवस्था किये ही तोड़ दिया गया। विभाग के रवैय्ये का खामियाजा आज पूरा गांव भुगत रहा है।
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