छोटी ही उम्र में चरस गांजा के शौक में डूबे स्कूली बच्चे

सर, हम अब कभी नशा नहीं करेंगे. बस एक बार मम्मी से बात करा दीजिये. उन लोगों को भी पकड़वा दूंगा जिनसे चरस-गांजा खरीदते थे.
यह बात कहते-कहते पटना के बुद्धा कॉलोनी स्थित एक नशा मुक्ति केंद्र में सात दिन से भर्ती नाबालिग की आंखों का पानी चेहरे पर लुढ़क आता है. कक्षा आठ में 70% अंक लाने वाला केंद्रीय विद्यालय के इस छात्र को नौवीं में नशे की ऐसी लत लगी कि पढ़ाई छोड़ दी.
किताबों के बहाने पैसे लाकर चिरैयाटाड़ पुल के समीप एक कॉलेज के पास से 400 रुपये में ब्राउन शुगर, 50 रुपये में गांजा की पुड़िया खरीदता रहा. मोबाइल तक गिरवी रख दिये.  नशा करने पर बड़ा भाई पिटाई करता था, लेकिन बाद में वह भी नशा करने लगा. उसके जैसे कई बच्चों की नशे की लत छुड़ाने की कोशिश हो रही है. कई  बच्चे उद्योगपति-नौकरशाह परिवारों से हैं.
 
बिहार में बांग्लादेश पैटर्न 
एडिक्शन डिस आर्डर स्पेशलिस्ट (नशा मुक्ति के विशेषज्ञ ) डॉ विवेक विशाल कहते हैं बिहार में बांग्लादेश के पैटर्न पर नशा बढ़ रहा है. संपन्न परिवारों के बच्चों में   गांजा गरीब बच्चों में व्हाइटनर का नशा कॉमन है. डॉ विवेक बताते हैं कि नशा करने वाली लड़कियों की संख्या लड़कों के करीब- करीब बराबर है.  हेरोइन का नशा न्यूनतम हैं. 2018 में इओयू ने सात किलो हेरोइन जब्त की थी.
 
टीम तैनात
बिहार की नयी पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाने को आर्थिक अपराध इकाई ने सरकारी और नामचीन कांवेंट स्कूलों के बाहर अपनी टीम तैनात कर दी है. पांच दिन पहले पटना में 12, मोतिहारी में दो स्कूलों में टीम तैनात करने के आदेश दिये गये हैं. कार्रवाई में जब्त नशीले पदार्थों को रखने के लिये 47 डबल लॉक सेफ स्टोरेज गोदाम का निर्माण पहले ही किया जा चुका है.
बढ़ रहा आंकड़ा
वर्ष अवैध खेती
2018 153
2017 70+
2016 376.86
2015 13.49
2014 24.72
2013 37.92
पटना : सब्जी बाग नशे का सेंटर 
पटना : सब्जी बाग से भिखना पहाड़ी के आसपास का इलाका नशीले पदार्थों का होलसेल सेंटर है. यहां से राजापुर, बालू पथ दीघा, दानापुर टेंपो स्टैंड, सगुना मोड़, फुलवारी शरीफ, खगौल, हनुमान नगर, मलाही पकड़ी, बहादुरपुर बाजार समिति क्षेत्र, मोहल्ला खान मिर्जा, त्रिपौलिया, आलमगंज, खाजा किला क्षेत्र में नशीले पदार्थ सप्लाइ हो रहे हैं.

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