शारदा घोटाला आरोपी कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार फिर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट,

कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अदालत से कहा है कि उन्हें गिरफ्तारी से बचने के लिए सात और दिनों की मोहलत दी जाए। उन्होंने कहा है कि पश्चिम बंगाल में वकीलों की हड़ताल के चलते उन्हें समय दिया जाए। आपको बात दें कि सुप्रीम कोर्ट ने शारदा चिट फंड घोटाला मामले में राजीव कुमार को गिरफ्तारी से संरक्षण देने संबंधी अपना आदेश पिछली सुनवाई में वापस ले लिया था।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पांच फरवरी को राजीव कुमार को गिरफ्तारी से दिया गया संरक्षण 17 मई से सात दिन तक प्रभावी रहेगा ताकि वह राहत के लिए सक्षम अदालत जा सकें। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की पीठ ने अपने फैसले में सीबीआई से कहा कि वह इस मामले में कानून के अनुसार काम करे।

आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार की ओर से पेश हुये एक वकील ने कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश के अनुसार अगले सात दिन तक उन्हें गिरफ्तारी नहीं किया जा सकेगा। न्यायमूर्ति खन्ना ने फैसले का मुख्य अंश सुनाते हुये कहा, ”हमने पांच फरवरी को राजीव कुमार को प्रदान किया गया संरक्षण वापस ले लिया हैं।

उन्होंने कहा, ”हम कानून के अनुसार इस मामले में कदम उठाने के लिये इसे सीबीआई पर छोड़ रहे हैं। हमारा पांच फरवरी का आदेश आज से सात दिन तक जारी रहेगा ताकि राजीव कुमार राहत के लिये सक्षम अदालत से संपर्क कर सकें। न्यायमूर्ति खन्ना ने अपना आदेश सुनाने से पहले कहा, ”इस मामले में जो कुछ हुआ है उस पर हमने चिंता व्यक्त की है।

निर्वाचन आयोग ने बुधवार को कुमार को, जो पश्चिम बंगाल में सीआईडी के अतिरिक्त महानिदेशक पद पर तैनात थे, हटाने का आदेश दिया था क्योंकि वह राज्य में हिंसा की घटनाओं पर काबू पाने में कथित रूप से नाकाम रहे। आयोग ने उन्हें बृहस्पतिवार को केन्द्रीय गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करने का निर्देश दिया था। कोलकाता में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाओं के बाद आयोग ने राजीव कुमार के साथ ही पश्चिम बंगाल के प्रमुख सचिव (गृह) अत्री भट्टाचार्य को भी पद से हटाने का आदेश दिया था।

इससे पहले, कुमार शारदा चिट फंड घोटाले की जांच के लिये गठित पश्चिम बंगाल के विशेष जांच दल के मुखिया थे। बाद में मई, 2014 में शीर्ष अदालत ने इस मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी थी। केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि वह कुमार को हिरासत मे लेकर पूछताछ करना चाहती है क्योंकि प्रथम दृष्ट्या इस बात के सबूत हैं कि उन्होंने इस मामले में कुछ बड़े लोगों को बचाने के लिये साक्ष्यों को कथित रूप से नष्ट किया है या उनके साथ छेड़छाड़ की है।

शीर्ष अदालत ने पांच फरवरी को शारदा चिट फंड घोटाला मामले में कोलकाता के पूर्व पुलिस आयुक्त राजीव कुमार को गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करते हुये उन्हें इस घोटाले से संबंधित मामले की जांच में केन्द्रीय जांच ब्यूरो के साथ पूरी ईमानदारी से सहयोग करने का निर्देश दिया था। जांच ब्यूरो के आवेदन पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह इस बात की जांच करेगी कि क्या कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ करने के लिये पुख्ता साक्ष्य हैं। न्यायालय ने जांच एजेन्सी की केस डायरी का भी अवलोकन किया था।

कुमार के वकील ने जांच एजेन्सी की दलीलों का प्रतिवाद करते हुये कहा था कि हिरासत में पूछताछ का मकसद ‘सिर्फ उनका अपमान करना है और सीबीआई को कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। कुमार के वकील ने यह भी दलील दी कि शीर्ष अदालत के निर्देश पर जांच ब्यूरो ने इस आईपीएस अधिकारी से करीब 40 घंटे पूछताछ की थी लेकिन इसके बाद भी वह यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि इस अधिकारी ने कौन सा अपराध किया है जिसके लिये उससे हिरासत में पूछताछ की जरूरत है।

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