रीतलाल यादव से थर-थर कांपता है बिहार


बिहार की राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं जिनपर अपराधिक आरोप हैं तो कई ऐसे भी हैं जो आपराधिक गतिविधियों में अभी भी शामिल हैं. आतंक ऐसा है कि इनके नाम के पहले बाहूबली जोड़ा जाता है। वैसे तो इनका धंधा काला होता है लेकिन अपनी कॉलर को सफेद रखने के लिए ये राजनीति का दामन थाम लेते हैं। हम बात कर रहे हैं पटना के दानापुर के MLC रितलाल यादव की जिनका आतंक पटना समेत पूरे सूबे में कुछ इस तरह कायम है कि जेल में कैद रहने के बावजूद भी लाखों-करोड़ों का हफ्ता वसूली, अवैध जमीन कब्‍जा, रंगदारी का काम किया जाता है।

पिछले साल मई में ही रीतलाल यादव रंगदारी को लेकर सुर्खियों में थे। रीतलाल यादव के गुर्गो द्वारा एक बार फिर एक शिक्षण संस्थान के मालिक से 1 करोड़ रूपए रंगदारी की मांग की गई थी। वहीं दूसरी तरफ रजिस्टर्ड डाक से जिंदा कारतूस भेजकर एक जाने-माने डॉक्टर से 50 लाख रुपए की रंगदारी की मांग की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार शहर के एक नामी शिक्षण संस्थान के मालिक से बदमाशों ने फोन पर रंगदारी की मांग की थी। वहीं शिक्षण संस्थान के मालिक द्वारा जब बदमाशों की बात अनसुनी कर दी गई तो गुर्गों ने जेल की सलाखों के पीछे कैद अपने आका रीतलाल यादव से फोन पर बात कराई। फोन पर बात करने के दौरान रीतलाल यादव ने पैसा नहीं देने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी। इस तरह के रंगदारी मांगे जाने के बाद शिक्षण संस्थान के मालिक ने पुलिस की मदद लेते हुए इस मामला इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

बता दें अप्रैल 2017 में बिहार में जेल के अंदर से रंगदारी मांगने की घटना का खुलासा हुआ था। मामला राजधानी पटना से जुड़ा है जहां सूबे के सबसे बड़े जेल यानि बेऊर जेल के अंदर से रंगदारी वसूली जा रही है। इस बात का खुलासा पटना पुलिस ने किया था। रंगदारी मांगने के इस खेल में पटना पुलिस की विशेष टीम ने अपराधी सोनू को गिरफ्तार किया, जिसने पुलिस की पूछताछ में इस बात का खुलासा किया। उसका कहना है कि वह जेल के अंदर बंद निर्दलीय एमएलसी रीत लाल यादव के लिए ठेकेदारों से जबरन उगाही करता है। गिरफ्तार अपराधी की मानें तो वसूली के पैसे में रीतलाल यादव का चार से पांच प्रतिशत का शेयर होता है। पटना एसएसपी मनु महाराज के समक्ष उसने इस बात का भी खुलासा किया था कि रीतलाल यादव जेल के अंदर से ही उसे तमाम तरह का निर्देश देता है, जिसे वह पूरा करता है।

ध्यान देने योग्य है कि जब 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती लालू के पूर्व साथी और बीजेपी उम्मीदवार रामकृपाल यादव के खिलाफ जूझ रही थीं, तो उनसे अत्यधिक स्नेह रखने वाले पिता और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख ने लंबी डग भरने का फैसला किया था। लालू प्रसाद ने पटना की बेऊर जेल में कई तरह के आरोपों में बंद दानापुर के डॉन रीतलाल यादव की ओर कदम बढ़ाया। रीतलाल पर अप्रैल 2003 में बीजेपी नेता सत्य नारायण सिन्हा की हत्या का आरोप भी है। लालू ने रीतलाल को आरजेडी का महासचिव घोषित कर दिया। रीतलाल ने 2010 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ा था और बीजेपी उम्मीदवार से हारकर दूसरे पायदान पर रहे थे। वे लालू की बेटी को समर्थन देने पर राजी हो गए, हालांकि इसके बावजूद मीसा जीत नहीं दर्ज कर सकीं।
एक साल बाद लालू रीतलाल को विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाने में नाकाम रहे क्योंकि पटना सीट उन्हें गठबंधन सहयोगी जनता दल (यू) के लिए छोडनी पड़ी। लेकिन आरजेडी महासचिव ने लालू के खिलाफ बगावत कर दी और निर्दलीय के तौर पर लड़ते हुए जीत दर्ज की

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *