ये पार्टियां भी मांगती रही हैं सवर्ण आरक्षण, क्या संसद में देंगी मोदी सरकार का साथ?

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने सवर्ण समुदाय को 10 फीसदी आरक्षण देने का ट्रंप कार्ड चला है. सोमवार को मोदी सरकार ने कैबिनेट बैठक में आर्थिक आधार पर पिछड़े सवर्ण समुदाय के लोगों को आरक्षण देने के फैसला किया है. इसके लिए सरकार संविधान संशोधन बिल मंगलवार को संसद में पेश कर सकती है.

दिलचस्प बात ये है कि सवर्ण आरक्षण को लेकर बीजेपी ने सोमवार को कदम उठाया है. लेकिन दलितों और पिछड़े वर्गों के नेताओं में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को छोड़ दें तो अधिकांश नेता गरीब सवर्णों को आरक्षण देने के पक्षधर रहे हैं. कांग्रेस ने 10 फीसदी सवर्ण आरक्षण की मांग उठाई थी तो सपा, बसपा, एलजेपी और आरपीआई जैसे दल 10 से 25 फीसदी आरक्षण देने की वकालत करती रही हैं, लेकिन अब जब मोदी सरकार इस पर संविधान संशोधन की बात कर रही हो तो सवाल उठता है कि इनमें से कितनी पार्टियां संसद में सरकार का साथ देंगी.

मायावती भी सवर्ण आरक्षण की समर्थक

बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती काफी लंबे समय से गरीब सवर्णों को आरक्षण देने की मांग करती रही हैं. मायावती सवर्ण समाज व मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समाज के गरीबों को भी आर्थिक आधार पर अलग से आरक्षण देने के लिए संविधान संशोधन के पक्ष रही हैं. यूपी में मुख्यमंत्री रहते हुए मायावती ने केंद्र सरकार को इस संबंध में चिट्ठी लिखी थी. अब सवाल उठता है कि क्या इस बिल को मायावती का नैतिक समर्थन मिलेगा. क्योंकि लोकसभा में बीएसपी का कोई सांसद नहीं है.

कांग्रेस की 10 फीसदी मांग

मोदी सरकार के खिलाफ 6 सितंबर को जब सवर्णों ने एससी-एसटी संशोधन अधिनियम 2018 के विरोध में भारत बंद का ऐलान किया तब आरक्षण का सवाल भी उठाया गया था. कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बयान दिया था कि गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए.

एलजेपी 15 फीसदी सवर्ण आरक्षण

मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान भी सवर्ण आरक्षण के पक्ष में रहे हैं. उन्होंने पटना में गरीब सवर्णों के पक्ष में 15 फीसदी आरक्षण देने की बात कही थी. वह सरकार के कितना साथ हैं यह देखना होगा.

आठवले ने 25 फीसदी आरक्षण की मांग

आरपीआई के अध्यक्ष और मोदी सरकार में मंत्री रामदास आठवले भी लगातार गरीब सवर्ण आरक्षण की मांग करते रहे हैं. आठवले ने 25 फीसदी आरक्षण की वकालत की थी. उन्होंने कहा था कि सवर्णों में सभी आर्थिंक रूप से सम्पन्न नहीं होते, इसलिए सवर्ण जातियों को 8 लाख रुपये की क्रीमीलेयर लगाकर 25 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए.

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