बीएयू सबौर में “ऑर्गेनिक पेस्ट मैनेजमेंट: “सस्टेनेबल एग्रीकल्चर” विषय पर शॉर्ट कोर्स का हुआ शुभारंभ

आज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा वित्त पोषित “ऑर्गेनिक पेस्ट मैनेजमेंट: “सस्टेनेबल एग्रीकल्चर” विषय पर शॉर्ट कोर्स का उद्घाटन कुलपति, बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर प्रोफेसर अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता एवं मुख्य अतिथि पूर्व कुलपति असम कृषि विश्वविद्यालय जोरहाट, प्रोफेसर ए एन मुखोपाध्याय एवं पूर्व निदेशक शोध, चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार, डॉक्टर बी एल जलाली की गरिमामय उपस्थिति में उद्घाटन हुआ।
कुलपति ने अपने संबोधन में सर्वप्रथम योजना निदेशक बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर एवं कोर्स डायरेक्टर 10 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ अरुण कुमार को इस विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने एवं इसके माध्यम से देश के वैज्ञानिकों को प्रशिक्षित करने की बधाई देते हुए तारीफ की।
उन्होंने कहा कि पिछले 32 वर्षों से किसानों को संतुलित उर्वरक व्यवहार करने हेतु प्रशिक्षित करने के बावजूद भी किसान उर्वरक कि असंतुलित मात्रा का व्यवहार करते हैं।
जिसका दुष्परिणाम सभी के समक्ष है। फसल उत्पादन बढ़ाने हेतु अधिक मात्रा में रसायनों का प्रयोग करने से न सिर्फ की विरोधी क्षमता का विकास हुआ है बल्कि पूरा पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
कुलपति ने कार्यक्रम में भाग ले रहे प्रशिक्षणार्थियों से आग्रह किया कि प्रशिक्षण उपरांत यहां से सीखी हुई तकनीकी संस्थान व क्षेत्र से जरूर साझा करेंगे। डॉ मुखोपाध्याय ने अपने संबोधन में बताया कि वर्तमान में फसलों में कीड़े मकोड़े एवं रोग व्याधियों से होने वाली क्षति को कम करने के लिए प्रतिवर्ष लगभग 2,25,000 करोड़ रुपए खर्च किया जाता है, फिर भी नुकसान को कम करने में बहुत सफलता हासिल नहीं हो पाई है।
उन्होंने रसायनों के दुष्प्रभाव के बारे में चर्चा करते हुए यह सुझाव दिया कि अब समय आ गया है कि हमें ऑर्गेनिक कृषि को बढ़ावा देने पर विशेष बल देना होगा। जिसके लिए विभिन्न प्रकार के कार्बनिक एवं जैविक तकनीकों को चिन्हित करना लोगों के बीच में प्रचारित एवं प्रसारित करना होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि बहुत सारे रसायनों का हमारे देश में बैन होने के बावजूद भी खरीद एवं बिक्री अभी भी हो रही है।
जलाली ने अपने संबोधन में बताया कि ऑर्गेनिक पेस्ट मैनेजमेंट द्वारा उत्पादित कृषि उत्पादों को सही मूल्य मिलने हेतु बाजार मूल्य निर्धारण के साथ ही साथ विदेशों में भी भेजा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि परंपरागत स्वदेशी तकनीक को पुनः मूल्यांकन करते हुए ऑर्गेनिक पेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली में सम्मिलित करने की जरूरत है।
डॉक्टर रेवती रमण सिंह अधिष्ठाता ने अपने संबोधन में वर्तमान में हो रहे रसायनों की असंतुलित एवं बिना सोची-समझी मात्रा का प्रयोग करना इत्यादि पर विशेष जानकारी दी।
डॉ अरुण कुमार निदेशक योजना कम कोर्स डायरेक्टर ने कार्यक्रम में शिरकत कर रहे सभी लोगों का स्वागत एवं आभार प्रकट किया व शुरू हुए 10 दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत किए।

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