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बिहार: पत्रकारों को मान्यता देने के मामले में कठघरे में खड़ा होता दिख रहा जनसंपर्क विभाग

ब्रजेश ठाकुर प्रकरण के होने के बाद जनसंपर्क विभाग ने मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची वेबसाइट से हटा दी है. (फाइल फोटो)
कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने सरकार की ओर से मान्यता दिए जाने के पैमाने पर सवाल खड़ा कर दिया है.
मुजफ्फरपुर रेप कांड मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने पत्रकारिता की आड़ में कुकर्म किया जिससे पत्रकारिता और पत्रकार कठघरे में खडे हो गए हैं. यहां तक कि सियासी दल भी अब पत्रकारिता और पत्रकारों पर सवाल खडे कर रहे हैं. कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने सरकार की ओर से मान्यता दिए जाने के पैमाने पर सवाल खड़ा कर दिया है.

कौकब कादरी ने ब्रजेश ठाकुर का हवाला देते हुए कहा है कि सरकार ऐसे ही पत्रकारों को मान्यता देकर गोरखधंधे में लगा रही है.देखा जाए तो सवाल उठना भी लाजिमी है. क्योंकि सूचना जनसंपर्क विभाग की ओर से बिना जांच पडताल के ऐसे पत्रकारों को मान्यता दे दी गई जो इसके लायक नहीं थे.

पीआरडी डिपार्टमेंट के मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची खंगालने के बाद कई ऐसे अखबार और वेबसाइट के नाम सामने आए हैं जिनका ब्यौरा नेट पर सर्च करने के बाद भी नहीं मिलता है. पीली खबर डॉट काम, गरम हवा, डेली न्यूज आनलाईन डाट इन, न्यूज स्ट्रीट, राष्ट्रीय न्यूज सर्विस जैसे कुछ नाम इस लिस्ट में शामिल हैं.

बिहार सरकार के मंत्री जय कुमार सिंह का कहना है कि ऐसी चूक इसलिए हो गई क्योंकि पत्रकारों पर जल्दी कोई सवाल खडे नहीं करता है. लेकिन जिस तरह की बातें सामने आ रही हैं वैसे में पूरे मामले की पड़ताल जरुरी है.

पूरे मामले में बिहार सरकार का सूचना जनसंपर्क विभाग इसलिए भी कठघरे में खडा हो गया है क्योंकि ब्रजेश ठाकुर प्रकरण के उजागर होने के बाद विभाग ने मान्यता प्राप्त पत्रकारों की पूरी सूची ही विभागीय वेबसाईट से हटा दी है. अगर विभाग अपनी जगह पर सही होता तो ऐसी नौबत ही क्यों आती. लेकिन अब पूरे मामले में सूचना जनसंपर्क विभाग भी कठघरे में खडा हो गया है.

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