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जब वाजपेयी को हराने के लिए कांग्रेस ने करवाया था इस फिल्म स्टार से प्रचार

वाजपेयी ने 1953 में लोकसभा उपचुनाव में पहली बार लखनऊ से किस्मत आजमाई थी.

भारत में संभवत: पहली बार किसी फिल्म स्टार ने चुनाव प्रचार किया था.
नई दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी शुक्रवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गए. राष्‍‍‍‍‍‍ट्रीय स्‍मृति स्‍थल पर हिंदू रीति रिवाज के साथ मुखाग्नि दे दी गई. वाजपेयी को उनकी दत्‍तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्या ने मुखाग्नि दी. इस दौरान स्‍मृति स्‍थल पर राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत पक्ष-विपक्ष के सभी बड़े नेता मौजूद रहे. क्या आपको पता है कि कांग्रेस ने अटल बिहारी को हराने के लिए सिने स्टार का सहारा लिया और उनसे अपने उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार कराया था. भारत में संभवत: पहली बार किसी फिल्म स्टार ने चुनाव प्रचार किया था.

दरअसल, वाजपेयी ने 1953 में लोकसभा उपचुनाव में पहली बार लखनऊ से किस्मत आजमाई थी. हालांकि वह चुनाव हार गए. इसके बाद 1957 के लोकसभा चुनाव में वाजपेयी ने तीन सीटों – बलरामपुर, मथुरा और लखनऊ से चुनाव लड़ा. मथुरा से वह बुरी तरह हारे थे. लखनऊ में हालांकि उन्हें ठीक-ठाक मत मिले लेकिन बलरामपुर से उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार हैदर हुसैन के खिलाफ दस हजार वोट से जीत दर्ज की. अगले लोकसभा चुनाव 1962 में वह दो सीटों – बलरामपुर और लखनऊ से लड़े. बलरामपुर से कांग्रेस ने उनके सामने सुभद्रा जोशी को उतारा था. संयोगवश, वाजपेयी और जोशी दोनों ने 1943 ने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया था लेकिन दोनों की विचारधार अलग थी.

बलराज शाहनी ने किया था कांग्रेस के लिए प्रचार
वाजपेयी को हराने और सुभद्रा जोशी की जीत सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने सिने स्टार बलराज शाहनी से प्रचार करवाया था. कांग्रेस को अपनी रणनीति में कामयाबी मिली और वाजपेयी यह चुनाव हार गए. वाजपेयी को हराने के बाद सुभद्रा जोशी कांग्रेस में एक बड़ा चेहरा बनकर उभरीं. हालांकि, वाजपेपी ने भी जल्द संसद में फिर से एंट्री ले ली. उन्हें जनसंघ ने राज्यसभा के जरिये संसद भेजा.

1967 में सुभद्रा जोशी से हिसाब चुकता किया
1967 के चुनावी मैदान में अटल बिहारी वाजपेयी के सामने एक बार फिर से सुभद्रा जोशी थी. इस बार वाजपेयी ने सुभद्रा जोशी को हरा दिया. 15 सालों तक बलरामपुर की सक्रिय राजनीति में कायम रहे. अटल जी का लखनऊ से भी खास लगाव था. 1991 में वह पहली बार लखनऊ से लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे. इसके बाद वे प्राय: सभी लोकसभा चुनाव में (1980 को छोड़कर) अन्य स्थानों के अलावा लखनऊ से भी उम्मीदवार हुआ करते थे. अटल बिहारी वाजपेयी को लखनऊवासी सिर्फ अटलजी कहकर संबोधित करते हैं. लखनऊ अटल बिहारी की कर्मभूमि है.

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