अब अपराधियों का सुराग लगाएंगे पुलिस के मुखबिर

अपराधियों पर अंकुश लगाने में नाकाम पुलिस अब मुखिबरों का जाल तैयार कर रही है। वह ऐसे लोगों का नेटवर्क तैयार कर रही है जो पुलिस को हर छोटी-बड़ी जानकारी देते रहें। कई थाना क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां पुलिस को घटना के बाद भी कोई सुराग नहीं मिल पा रहा है। ऐसे थाना प्रभारी अपराध का दबाव कम करने के लिए अपराधियों के पीछे मुखबिर लगा रहे हैं।

मुखबिर से मिलती थी मदद :पुलिस विभाग में मुखबिर रखने की व्यवस्था पहले से ही रही है। इसके लिए पुलिस विभाग पैसे भी खर्च करता था लेकिन अब इस दिशा में बहुत ध्यान नहीं दिया जाता है, जिस कारण से पुलिस का सूचना तंत्र कमजोर होते जा रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो सूचना तंत्र को मजबूत करने को लेकर ही पुलिस अब नेटवर्क तैयार करने में लगी है।

कुछ साल पहले तक जब मोबाइल या सूचना प्रौद्योगिक विकसित नहीं थी, तब पुलिस मुखबिर तंत्र के बूते बड़ी से बड़ी वारदात का भी खुलासा कर देती थी। मगर हाल के वर्षों में सीसीटीवी, कॉल रिकार्ड, लोकेशन ट्रेस करने समेत अन्य तकनीक का इस्तेमाल कर वारदात का चुटकी बजाते खुलासा करने वाली पुलिस अब इन चीजों के मददगार न होने की स्थिति में लाचार  है। अब बढ़ते अपराध ने पुलिस को एक बार फिर से मुखबिरों का सहारा लेने को मजबूर कर दिया है |

कसेगा शिकंजा
सूचना तंत्र को मजबूत करने को लेकर आला अधिकारियों ने दिया है निर्देश
नेटवर्क तैयार करने में नए सिरे से जुटी है राजधानी सहित प्रदेश की पुलिस
शराब तस्करों के साथ अन्य गंभीर घटनाओं को सुलझाने में मिलेगी मदद

अपराध पर अंकुश लगाने और अपराधियों की निगरानी के लिए सूचना तंत्र को मजबूत किया जा रहा है। किसी भी हाल में अपराधियों को बख्शा नहीं जाएगा ।
– गुप्तेश्वर पांडेय, डीजीपी , बिहार

 

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